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Feedback – पुनर्निवेश

Posted On: 2 Feb, 2010  
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Others टेक्नोलोजी टी टी में

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Hello world!

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

आदरणीय निशा मित्तल जी, जरूरत के हिसाब से jagranjunction.com के होमपेज का डिजाइन बदल दिया गया है. पिछले होमपेज के डिजाइन में जो व्यवस्था हमारे पाठकों के लिए थी, वह इस नए डिजाइन में भी है. बस उनके जगह को बदल दिया गया है. - इसके अलावा 20 की जगह 15 फीचर किया जा रहा है जिसमें पाठकों के फोटो की साइज बढ़ा दी गई है. - पहले जो मेलर भेजने की व्यवस्था थी, जिससे पाठको को अपने मेल के जरिए best blogger बनने की जानकारी मिलती है, उसे कुछ समय के लिए रोक दिया गया है. - आपकी स्पेस की समस्या का भी समाधान कर दिया गया है. - रही बात Jagranjunction.com न खुलने की, तो बिना किसी समस्या के यह साइट खुल रही है और कमेंट भी हो रहा है. अगर फिर भी आपको यह समस्या दिख रही है तो स्क्रीन शॉर्ट लेकर feedback@jagranjunction.com पर भेज दें.

के द्वारा: Feedback Feedback

आदरणीय महोदय , सादर अभिवादन गाठ कुछ समय से मेरी जागरण साइट पर एक समस्या आ रही है,जागरण साइट खुलती नही ,परिणामस्वरूप अपनी पोस्ट्स पर आने वाले कमेंट्स के उत्तर मैं नही दे पाती ,साथ ही अन्य मित्रों की पोस्ट भी नही देख पाती . दूसरी समस्या जागरण पर पूर्व में एक पेज होम पेज के नाम से होता था,जहाँ पर सारी २० फीचर्ड पोस्ट्स रहती थी,और ब्लागर ऑफ़ दी वीक की जानकारी भी ,अब उसका जिक्र मुझको जागरण साइट पर कहीं नही मिला ,अतः मुझको अपने ब्लागर ऑफ़ दी वीक बनने की जानकारी भी मित्रों के बधाई देने से मिली ,अभी तक मैं स्वयम वो पेज नही देख सकी जिस पेज पर वो विवरण है.कृपया बताएं यदि आपने कुछ व्यवस्था बदली है तो उस पेज का लिंक दीजिये और पूर्व में ऐसी जानकारी यहाँ तक की पोस्ट रीडर ब्लॉग में फीच होने ब्लागर ऑफ़ दी वीक बनने और किसी नए आयोजन की हर ब्लागर को मेल में भी मिलती थी ,क्या वो व्यवस्था पुनः प्रारम्भ नही हो सकती . मेरा स्पेस भी कम रह गया है कृपया आवंटित करने का कष्ट करें ,आपका आभार  

के द्वारा: nishamittal nishamittal

के द्वारा:

सद्गुरु जी के आलेख पर प्रतिक्रिया देने के बजाय यही दे देता हूँ क्योंकि वहां तो सम्भव नहीं लग रही .. आदरणीय सद्गुरु जी, सादर अभिवादन! मुझे तो ऐसा लग रहा है की जिस दिन भारत किसी भी टीम के साथ क्रिकेट खेल रहा होता है उस दिन पूरा भारत और विश्व सिर्फ मैच ही देखता है ..उस दिन आतंकवादी भी मच देखने में ही मशगूल रहते हैं.. सीमा पर उस दिन हमला नहीं होता ...कोई लूट-पाट और छेड़छाड़ की घटनाएँ उस दिन नहीं होती. बिहार में परीक्षा सञ्चालन करने वाले और सुरक्षा गार्ड सभी सिर्फ मैच ही देखते हैं और उस दिन परीक्षार्थियों और अभिभावकों को पूरी छूट होती है ताकि नौनिहाल सर्टिफिकेट पा सकें ..और तो और ट्रैन दुर्घटनाएं भी उस दिन ठहर जाती है और दूसरे दिन किसी जनता एक्सप्रेस की जनता को निशाना बनती है....दुनिया में दो ही नाम हैं एक मोदी और दूसरा धोनी ...मेरी बातों को व्यंग्य में लीजियेगा आपकी क्रिकेट में रूचि और और उसपर आलेख काबिलेतारीफ है आप तो सर्वगुण संपन्न व्यक्ति हैं आखिर महात्मा संत ऐसे ही होते हैं... सादर!

के द्वारा: jlsingh jlsingh

मान्यवर महोदय ,                                सादर अभिवादन ,                                                            जागरण मंच निश्चित रूप से लेखन प्रतिभा को विकसित करने का सुअवसर नवोदित प्रतिभाओं को प्रदान करता है. रीडर ब्लाग्स में आने वाली विज्ञापन पोस्ट के कारण पोस्ट्स इतने पीछे पहुँच जाती हैं कि किसी कारण वश फीचर न होने पर या कम देर फीचर्ड रहने पर उसको कोई नहीं पढता अतः लेखक या लेखिका का सम्पूर्ण श्रम और उत्साह निरर्थक रहता है.पूर्व में विज्ञापन पोस्ट्स हटा दी जाती थी परन्तु आज सुबह १२ बजे वाली पोस्ट्स उन पोस्ट्स के कारण ५ वे पृष्ठ पर पहुँच गयी ,कृपया व्यवस्था सुचारू करने का कष्ट करें जिससे लेखक लेखियें उत्साहपूर्वक सक्रिय रह सकें.धन्यवाद

के द्वारा: nishamittal nishamittal

आदरणीय संपादक महोदय जी सादर नमस्कार यह प्रतिष्ठित मंच लोगों को लेखन से जोड़ कर उन्हें नित्य नव विचार आचार व्यवहार से परिष्कृत कर रहा है यह एक थेरपी सा है.कई गृहणियां जो एक दूसरे से विचार साझा करती हैं ....लिंग भेद की सीमाओं से दूर ...सुविचारों से पोषित हो पाती हैं वह अनजाने ही उन्हें सशक्त भी करता है और ज़िंदगी के मायने भी बताता है.एक अच्छा विचारही अच्छा कार्य भी बनता है....यह ज़रूर है कि इसे संचालित करने में वक़्त लगता है पर आपका यह नेक कार्य हिन्दी भाषा को एक अनोखा आयाम दे रहा है ....कईयों के लिए क्रोध,चिंता भटकाव से उबरने की दिशा में थेरपी का कार्य कर रहा है....बस इतनी विनती है कि इसकी नियमितता और बरकरार रहे. आपका अतिशय आभार

के द्वारा: yamunapathak yamunapathak

आदरणीय संचालक महोदय जी सादर नमस्कार आज हिन्दी दिवस के अवसर पर मुझे अपने इस अनुपम मंच की तरफ से बहुत ही सुन्दर उपहार मिला आपको बताना चाहूंगी बहुत महीनों से मैं ब्लॉग्स पर तसवीरें attach नहीं कर पा रही थी और अब जबकि मैंने कम्प्यूटर में फोटो तकनीक भी थोड़ी बहुत सीख ली है ब्लॉग्स पर उसे शेयर नहीं कर पाने की यह असमर्थता खल रही थी पर आज तो मानो जादू सा ही लगा मैं जिन सभी तकनीक दिक्कतों का सामना कर रही थी सभी दूर हो गईं .अब मैं अपने पसंदीदा ब्लॉग मंच पर दोगुनी उत्साह के साथ अपना काम कर पाउंगी .आज के दिन इससे महत्वपूर्ण और अमूल्य उपहार और कोई हो ही नहीं सकता . आपका बहुत बहुत आभार अपनी राष्ट्रभाषा के प्रचार प्रसार में आप जैसे विशाल सागर की एक बूँद जैसे हैं हम सब हिन्दी भाषा की यह पावन गंगा अपने विशुद्ध रूप में जन जन को सिंचित करती रहे ...मेरी यही शुभकामना है. यमुना

के द्वारा: yamunapathak yamunapathak

आदरणीय जागरण जंक्शन परिवार ! सादर हरिस्मरण ! महोदय आपसे निवेदन है कि हिंदी दिवस पर किसी प्रतियोगिता का आयोजन करें अथवा इससे संबंधित ब्लॉग लिखने के लिए ब्लागरों को आमंत्रित करें ! इस बार हिंदी दिवस पर आपने ब्लॉग लेखन का कोई आयोजन करने में में अबतक रूचि कोई नहीं ली है,ये बहुत दुखद है ! इस समय मोदी जी की हिंदी प्रेमी सरकार है ! ब्लागरों के अच्छे सुझाव उन तक पहुँचते तो शायद उनपर अमल भी होता ! आपसे एक बड़ी चूक हो रही है ! हिंदी दिवस पर देर से ही सही,परन्तु अब भी तत्काल किसी आयोजन की घोषणा करें ! आपसे एक और निवेदन है कि जागरण जंक्शन मंच के फीडबैक को प्रतिदिन देखने के लिए किसी को नियुक्त करें ! यहांपर ब्लागरों की समस्यायों को पढ़ने और जबाब देने वाला कोई नहीं है ! वरिष्ठ ब्लागरों को परेशान देखकर मुझे बहुत दुःख होता है ! वे लोग इस मंच की शोभा हैं ! इस मंच की बौद्धिक सम्पदा हैं ! ये मंच उन्ही के कारण प्रतिष्ठित और अनुपम बना हुआ है ! कृपया फीडबैक को सक्रीय करने की तरफ तुरंत ध्यान दें ! ह्रदय से आभार और धन्यवाद !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

आदरणीय संचालक महोदय जी यमुना का सादर नमस्कार मान्यवर, पिछले कुछ दिनों से मैं जब भी ब्लॉग टाइप करने की कोशिश कर रही हूँ HTML पर क्लिक करने से कोई रिजल्ट नहीं मिलता और शब्द बिलकुल टाइप नहीं हो रहे हालांकि dash बोर्ड ओपन हो जाता है.आप को मालूम है अपने इस अनुपम मंच से दूर मैं ज्यादा देर नहीं रह सकती,ब्लॉग्स लिखने के लिए हिन्दी दिवस सा अवसर चूक ना जाऊं मेरे लिए यह भी एक अहम बात है ..कई विषयों पर विचार हैं ब्लॉग का ड्राफ्ट भी तैयार नहीं कर पा रही हूँ .आशा है आप इस दिशा में मेरी त्वरित मदद करेंगे.मैं कृतज्ञ हूँ कि हमें आपने एक ऐसा प्लेटफार्म दिया जो पूर्णतः निःशुल्क है और हम सब हिन्दी भाषा के बहुत ही अदने से ब्लोग्गेर्स को अपने विचार इतने प्रतिष्ठित माध्यम से साझा करने का सुअवसर दिया है .आप को पता है इस सम्मानीय मंच से जुड़ कर मुझे अब सिर्फ सामाजिक ,आर्थिक ,विषयों की तरफ रूझान के साथ साथ राजनीति जैसी कभी रुचिकर ना लगाने वाले विषय के प्रति भी रूझान हो गया है.जब किसी संस्था से हम इस तरह लाभान्वित होते हैं तो हमारी रूचि और सम्मान दोनों ही संस्था के प्रति दुगुनी रफ़्तार से बढ़ने लगती है. हिन्दी दिवस पर इस प्रतिष्ठित अनुपम मंच की वैचारिक दुनिया से जुड़े प्रत्येक सदस्य को बहुत सारी शुभकामना आपका अतिशय धन्यवाद.

के द्वारा: yamunapathak yamunapathak

आदरणीय सिंह साहब ! हार्दिक अभिनन्दन ! दिन मंगलमय हो ! सिंह साहब आप निश्चिन्त रहें,मैं मंच छोड़कर नहीं जा रहा हूँ ! समय और ईश्वर की इच्छा जबतक होगी,तबतक मैं मंच पर मौजूद रहूँगा ! मेरी निजी धारणा है कि किसी भी चीज को अपनी ओर से न पकड़ो और न छोडो ! समय ओर ईश्वर जब चाहेंगे तो जो छूटना होगा,वो अपने आप छूट जायेगा ! यदि मैं चाहता तो चुपचाप नया ब्लॉग बना लेता,परन्तु मैंने ऐसा नहीं किया ! अभी मैं नया ब्लॉग बनाने नहीं जा रहा हूँ ! मैं चाहता हूँ कि जागरण जंक्शन परिवार कुछ तो जबाब दे ! वे किसी भी ब्लॉगर के सवाल या समस्या का जबाब नहीं दे रहे हैं ! ये केवल ब्लॉगरों की ही नहीं बल्कि फीडबैक की भी तौहीन है ! ऐसे जबाब न देने वाले महत्वहीन फीडबैक का फायदा क्या है ? वो जबाब भी देंगे और स्पेस भी बढ़ाएंगे ! आपका सुझाव अच्छा लगा कि चित्रों का प्रयोग कम किया जाये ! आप निश्चिन्त रहिये मेरे भीतर के भगवान कृष्ण यही कहते हैं कि वो जबाब भी देंगे और स्पेस भी बढ़ाएंगे ! सहयोग और समर्थन के लिए ह्रदय से आभार !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

के द्वारा:

आत्मा एक अंधविश्वास है | 4. चौथा प्रयोग – विदेशी संस्कृति के कुछ दलाल सम्पूर्ण मनुष्य समाज को इस धारणा से भी दिग्भ्रमित करते हैं कि जब प्राणी मरता है , तो उसकी देह से आत्मा फुर्र निकल कर दूसरे शरीर में प्रवेश कर जाती है | यदि मरते समय किसी प्राणी को कांच के बॉक्स में बंद कर दिया जाता है , तो आत्मा कांच के बॉक्स को भी तोड़ कर निकल जाती है | आत्मा की उपस्थिति को सत्यापित करने के लिए कांच का एक बंद बॉक्स या पारदर्शी पोलीथीन लेते हैं | बॉक्स या पालीथीन में कुछ जहरीला पदार्थ रख देते हैं और बॉक्स या पालीथीन में कुछ केंचुए , मक्खी , कोकरोज या कुछ अन्य कीटाणु रख देते हैं और बॉक्स या पालीथीन को अच्छी प्रकार से सील कर देते हैं | थोड़ी देर बाद कांच के बॉक्स या पालीथीन में उपस्थित सभी जीव – जंतु मर जाते हैं | यदि उनके मरने पर बॉक्स या पालीथीन फट जाते हैं , तो निश्चित रूप से यह धारण प्रमाणित होगी कि आत्मा नाम की कोई वस्तु होती है | यदि बॉक्स या पालीथीन नहीं फटते हैं , तो यह सिद्ध होगा कि आत्मा नाम की कोई वस्तु नहीं होती है | महज मनुष्यों को दिग्भ्रमित करने के लिए यह एक कल्पना है , अंधविश्वास है | इस प्रयोग के प्रतिपादित करने पर न तो बॉक्स फटा , न ही पोलीथीन | इससे सिद्ध होता है कि आत्मा नाम की कोई वस्तु नहीं होती है | ज्यादा जानकारी के लिए पढ़ें – धर्म विज्ञान – 2 . यदि देश से अंधविश्वास को मिटाना है , तो ऐसे जनजागृति सन्देश जन जन तक पहुंचाना है , तभी हम हमारे देश को अंधविश्वास मुक्त बना सकते हैं |

के द्वारा:

हम सब भारतवासी कौन हैं ? सम्पूर्ण भारतवासी एक माँ की सन्तान हैं , लेकिन विदेशी घुसपेठियों ने अपने देश में आकर भाईचारे की एकता को छिन्न –भिन्न कर दिया | तीनों विदेशी संस्कृतियों ने भारत में आकर ऐसे बीज बोए कि उनकी फसल आज तक भारतीय नागरिक काट रहे हैं और अपने कर्मों को कोस रहे हैं | भारत की एक माँ से उत्पन्न सभी संतानें तीनों विदेशी संस्कृतियों के गुमान में एक दूसरे की जान की दुश्मन बनी हुई हैं | तीनों संस्कृतियों के अंधविश्वास में आकर अब तक लाखों भारतीय आपस में लडकर जान गंवा बैठे हैं | सर्वप्रथम भारत में आर्य संस्कृति आर्यों द्वारा लाई गई , जिन्होंने भारतीय भाइयों के बीच ऐसी संस्कृति परोसी कि सबसे पहले वर्ण व्यवस्था के आधार पर सब भारतीय भाई चार भागों में विभक्त हुए और उसके बाद हजारों जातियों में विभक्त करके आर्यों ने भारतीय नागरिकों पर राज्य किया और भारतीय नागरिकों की एकता को छिन्न-भिन्न कर दिया | फिर मुग़ल आए और उन्होंने भारतीय राजनीति पर कब्जा कर यहाँ के नागरिकों को धर्मों की झूठी कल्पना के आधार विभाजित कर दिया | उसके बाद अँग्रेज आए और उन्होंने भारतीय राजनीति पर कब्जा कर अपनी संस्कृति को बढ़ाने के लिए भारतीय नागरिकों को गरीवी – अमीरी के आधार पर विभाजित कर दिया | तीनों संस्कृतियों द्वारा तरह – 2 के काल्पनिक भगवानों एवं ग्रन्थों की रचना करके अपनी संस्कृति को फैलाया | आर्यों ने अपनी संस्कृति को संस्कृत भाषा के माध्यम से फैलाया , मुगलों ने उर्दू के माध्यम से और अंग्रेजों ने अंग्रेजी के माध्यम से फैलाया , यह तीनों भाषाएँ विदेशी संस्कृतियों की देन हैं , जिनके सभी भारतीय नागरिक आज भी गुलाम बने हुए हैं और इन विदेशी संस्कृतियों के गुमान में आज भी भारतीय एक दूसरे के खून के प्यासे बने हुए हैं | क्या हम आर्य संस्कृति के वंशज हैं , बिल्कुल नही | क्या हम मुग़ल संस्कृति के वंशज हैं , बिल्कुल नही | क्या हम ईसाई संस्कृति के वंशज हैं , बिल्कुल नही | हम भारतीय हैं , हमारी भाषा हिंदी है और हम सम्पूर्ण भारतीय द्रविड़ वंशी हैं , जिनकी संस्कृति मानवतावादी रही है | जो सम्पूर्ण भारतीय भाइयों को समानता और एकता के सूत्र में बांधती है और ईश्वर – भगवानों के नाम पर फैला रखी अंधविश्वासी संस्कृतियों का विरोध करती है |

के द्वारा:

आदरणीय जागरण जंक्शन परिवार सप्रेम मेरी आपको एक शिकायत भी है और सुझाव भी मेरी इस साहित्य सरताज प्रतियोगिता के परिणाम से आपत्ति है मुझे यह चयन पूरी तरह अपारदर्शी लगता है में आपसे यह कहना चाहता हूँ कि आप अपने चयन में पारदर्शिता क्यों नहीं बरतते आपने मेरा चयन क्यों नहीं किया सिर्फ इसलिए क्योंकि मेरे समर्थन कम थे या फिर इसलिए कि मेरी रचना में कमी थी या इसलिए कि आपका निर्णायक मंडल अपने जान पहचान के ही लोगों को चुनता है मेरा सुझाव यह है कि आपने चयन में पारदर्शिता नहीं बरती अपने चयन में पारदर्शिता बरतिये नहीं तो इस अपारदर्शी चयन से किसी भी अच्छे लेखक को ठेस पहुच सकती है धन्यवाद सहित

के द्वारा: ajay kumar pandey ajay kumar pandey

महोदय, लगता है कि आप जागरण जंक्शन को स्वयं नहीं पढ़ते. इस्मने रीडर्स ब्लॉग वाले भाग में प्राइवेट कंपनियों के विज्ञापन थोड़ी-थोड़ी देर बाद डाले जाते हैं. इस कारण जो गंभीर ब्लॉग लेखक हैं, उनकी पोस्ट बहुत पीछे चली जाती है और अगर कोई उस पर कमेंट करना भी चाहता है तो नहीं कर पाता. इसका कारण यह है कि जागरण जंक्शन में ब्लॉग पोस्ट करने पर कोई संख्यात्मक प्रतिबन्ध नहीं है. इसलिए मेरा सुझाव है कि आप प्रत्येक ब्लॉग लेखक पर प्रतिदिन अधिकतम एक या दो लेख डालने का नियम बना दें. इसके साथ ही विज्ञापन करने वाले ब्लोगों को पूरी तरह रोक दें. यदि आप ऐसा करेंगे तो अधिक लोग ब्लॉग से जुड़ेंगे और जागरण जंक्शन वास्तव में गंभीर चर्चा का मंच बन जायेगा. आशा है आप इस पर विचार करेंगे. धन्यवाद.

के द्वारा: विजय कुमार सिंघल विजय कुमार सिंघल

आदरणीया निशा मित्तल जी, नियमानुसार लिंक पेस्ट करते हुए अपने आलेख का वर्ग लिखकर फिर उसका लिंक पेस्ट करना होता है किंतु अगर आप अपने आलेख ऐसे डाल चुकी तो हैं तो कोई बात नहीं लेकिन आगे से कृपया आलेख वर्ग के साथ ही लिंक पेस्ट करें। अगर आप जंक्शन पर पूर्व में प्रकाशित किसी रचना को प्रतियोगिता में शामिल करना चाहती हैं तो प्रतियोगिता की अवधि के दौरान उस पोस्ट को ‘पुन: प्रकाशित’ कर इसमें शामिल कर सकती हैं किंतु पूर्व में प्रकाशित किसी रचना का ज्यों-का-त्यों पुराना लिंक पेस्ट करने पर प्रतियोगिता में शामिल नहीं किया जाएगा। आपके माध्यम से हम सभी पाठकों से अनुरोध करना चाहेंगे कि कि कृपया प्रतियोगिता के नियम एवं शर्तें दुबारा पढ़ लें।

के द्वारा: Feedback Feedback

माननीय निशा मित्तल जी, साहित्य में लेख की विभिन्न शैलियों संस्मरण, सामान्य आलेख आदि की तरह ‘आलोचना’ भी एक विधा है। इसमें राजनीति, समाज, साहित्य, तकनीक या किसी भी विषय पर आप आलोचनात्मक शैली में आलेख लिखते हैं अर्थात संबधित विषय या मुद्दे के परिपेक्ष्य में उसके गुण-दोष, सार्थकता-निरर्थकता आदि पर चर्चा करते हुए आप अपनी सोच/भावनाओं को व्यक्त करते हैं। क्योंकि ‘साहित्य सरताज’ पूरी तरह साहित्य से जुड़ी प्रतियोगिता है इसलिए हमने साहित्य की अन्य महत्त्वपूर्ण शैलियों के साथ ‘आलोचनात्मक शैली’ को भी इसमें शामिल किया है। हमारी प्रतियोगिता शर्तों का ध्यान रखते हुए आप भी इस विधा में साहित्य, समाज और राजनीति पर आलोचनात्मक कृतियां शामिल कर सकती हैं।

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आदरणीय जागरण जंक्शन परिवार,महोदय सादर हरि स्मरण ! आप लोगों ने इस मंच पर मुझे जो भी सम्मान दिया है,उसके लिए ह्रदय से धन्यवाद.मै आप लोगों से एक आग्रह करना चाहता हूँ कि इस मंच के ब्लॉगर आदरणीय अनिल कुमार "अलीन" जी के साफ्टवेयर को ठीक कर उन्हें बिना किसी बढ़ा के पुन:लिखने कि अनुमति दी जाये.बीच में जब उनका ब्लॉग पेज खुल रहा था,तब मैंने उनके लेख पढ़े थे.उनके लेख उच्च स्तर के हैं और पाठकों के लिए उपयोगी और शिक्षाप्रद हैं.इस समय पाठक उनके नए लेखों से वंचित हो रहे हैं.जीवन का कोई भरोसा नहीं है कि कौन कब तक जियेगा ? इसीलिए सच कहने वाले ऐसे विद्वान जब तक इस संसार में हैं,तब तक उनके विचार और अनुभव लोगों के बीच प्रसारित होना चाहिए और ये लोगों पर छोड़ दिया जाये की क्या वो पसंद करते हैं और क्या नहीं ? उनके किसी लेख में कोई आपत्तिजनक बात होगी तो जरुर आप से शिकायत करेंगे और आप कार्यवाही भी कीजियेगा,परन्तु फ़िलहाल अभी उन्हें ब्लॉग लिखने व् पोस्ट करने की अनुमति दी जाये.मै पहले की बातें नहीं जानता,परन्तु सच कहने वाले ऐसे विद्वान व्यक्ति से यदि जाने अनजाने कुछ गलतियां भी हुईं हैं तो उसे क्षमा करते हुए उन्हें पुन:ब्लॉग लिखने और पोस्ट करने की अनुमति प्रदान की जाये.इससे अनगिनत पाठकों को लाभ होगा.मेरी जानकारी के अनुसार उनके ब्लॉग के पाठक सबसे ज्यादा हैं.यदि आप लोग तत्काल अनिल कुमार अलीन जी के सॉफ्टवेयर को ठीक कर उन्हें लिखने और पोस्ट करने की सुविधा पुन:प्रदान करते हैं तो मुझे ही नहीं बल्कि इस मंच के सभी ब्लॉगरों को बहुत ख़ुशी होगी.सादर धन्यवाद और शुभकामनाओं सहित.

के द्वारा:

आदरणीय जागरण जंक्शन परिवार,सादर हरि स्मरण ! ब्लॉगिंग शिखर सम्मान प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए मैंने अपनी पसंद के १० लेखकों को चुना है और उन लेखकों का एक-एक लेख चुनकर प्रत्येक लेख के बारे में अपने कुछ विचार व्यक्त करने के साथ उनके लेख के साथ लिंक का विवरण भी दिया है.लिंक का विवरण देने के लिए लेख के नीचे दायीं तरफ tell & share में जाकर gmail दबाकर लिंक का विवरण ले लिया है.मै जानना चाहता हूँ कि प्रतियोगिता में भाग लेने का क्या ये सही तरीका है.इसमें कोई त्रुटि हो तो बताइये.आप के जबाब से बहुत से ब्लॉगरों को लाभ होगा जो प्रतियोगिता में भाग तो लेना चाहते है,परन्तु सही तरीके से कैसे भाग लें,ये समझ नहीं प् रहे हैं.अपने सादर प्रेम और शुभकामनाओं सहित.

के द्वारा:

आदरणीय अनिल कुमार ‘अलीन’ जी, महोदय जागरण जंक्शन स्वतंत्र विचारों की अभिव्यक्ति का मंच हैं. किंतु अभद्र, अश्लील, असंयमित, अमर्यादित तथा व्यक्तिगत, सामुदायिक निंदापरक टीका-टिप्पणियां अथवा किसी भी प्रकार की गैर-शालीन प्रहारात्मक व्यंग्यबाणों का इस मंच पर कोई स्थान न कभी रहा है और न कभी रहेगा। मंच पर स्वतंत्र रूप से या अन्य ब्लॉग पोस्ट पर ऐसी किसी टीका-टिप्पणी की निंदा करते हुए मंच उसे प्रतिबंधित करने के लिए स्वतंत्र है। मंच के निर्णय की अनुचित व अभद्र रीति से निंदा करने के कारण आपको ये चेतावनी जारी की जाती है कि आप के इस कृत्य के दुहराव पर मंच आपके विरुद्ध पर्याप्त व उचित विधिक कार्यवाही के लिए बाध्य होगा। आपसे अनुरोध है कि अपनी लेखन क्षमता का सार्थक उपयोग करें न कि ऐसी निंदनीय टीका-टिप्पणियों में समय जाया करें। धन्यवाद जागरण जंक्शन मंच

के द्वारा: Feedback Feedback

जागरण जंक्सन परिवार, सबसे पहले follyfawiseman , फिर sandeep kumar और अब Sufi, Dhyan Muhammad के नाम से संदीप नामक यह 'सिरफिरा आदमी' पहले जागरण जंक्सन पर सुनामी फैलाकर बहुत सारे सम्मानित ब्लोग्गर्स को मंच छोड़ने पर मजबूर कर चुका है. पुन: यह सद्गुरु जैसे सम्मानित व्यक्ति को अपमानित कर उन्हें भी मंच छोड़ने पर मजबूर कर रहा है. इसका उद्देश्य सिर्फ डिस्टर्ब करना होता है. आपलोग लगता है वह हादसा भूल चुके हैं जब आदरणीय राजकमल जिन्हें हम सब गुरुदेव के रूप में मानते थे, और आदरणीय शशिभूषण जी को भी काफी अपमानित कर चुका है. मेरा भी जागरण जंक्सन से अनुरोध है कि उचित कारर्वाई की जाय! अगर मंच को सुचारु ढंग से चलाया जाना चाहिए! विचारों का विरोध या मतान्तर होना लाजिमी है पर अभद्रता उचित नहीं है. ऐसा मेरा मानना है. पहले भी महिला अपमान पर विरोध हुआ है और अनुशासनहीनता पर भी कारर्वाई हुई है .... उम्मीद है जे जे के एडमिन ध्यान देंगे! आपका ही मंच एक ऐसा है जहाँ अनुचित पोस्ट और प्रतिक्रियाएं हटाई गयी है ... आपको भी स्मरण होगा! आप सब विचार करेंगे! इसी आशा के साथ! आप इनके पहले के भी सारे पोस्ट्स और प्रतिक्रियाएं देख सकते हैं. जवाहर

के द्वारा: jlsingh jlsingh

आदरणीय जागरण जंक्शन परिवार,महोदय आप से निवेदन है कि आप के द्वारा "बेस्ट ब्लागर ऑफ़ दी वीक चुने जाने का बाद मेरे नाम से ब्लॉग जारी कर मेरे ऊपर व्यक्तिगत हमले हो रहे हैं.आप इस ब्लॉग को देखें-"सद्गुरु श्री राजेंद्र ऋषि जी",इस ब्लॉग के अनुसार मै अज्ञानी हूँ और मुझे सम्मानित करने वाले आप लोग अपराधी हैं.कृपया आप लोग स्वयं इस ब्लॉग को पढ़ें.आप से निवेदन है कि बलात्कार पीड़ित लड़कियों और महिलाओं का मजाक उड़ाने वाले इन लेखों को भी आप पढ़ें-"चमेली ने चमन का बलात्कार किया" और "ठीक तो है बलात्कार".इन लेखों में समस्त नारी जाति का अपमान किया गया है.और बलात्कारियों का खुलकर समर्थन किया गया है.आप ऐसे लेखों का प्रचार-प्रसार कर रहे हैं,जिन पर महिला आयोग या किसी भी कोर्ट की नज़र पड़ने के बाद सम्मानित जागरण परिवार को भी परेशानी उठानी पड़ेगी.माननीय सुप्रिमकोर्ट के अनुसार किसी के भी विचारों को दण्डित किया जा सकता है,यदि वो सही नहीं हैं या समाज को क्षति पहुँचाने वाले हैं.यदि आप कोई कार्यवाही नहीं करते हैं और ऐसे विचारों का समर्थन और प्रचार-प्रसार करते हैं,जो मेरी ही नहीं बल्कि पूरे समाज और कानून की दृष्टि में भी गलत हैं.तो मुझे ऐसे मंच से हट जाना चाहिए.जिस देश में नारी की पूजा होती है और जिस देश में पहले से ही महिलाओं की हालत ख़राब है,वहाँ पर ऐसे विचार उनकी और दुर्दशा करेंगे.मुझे आप क्षमा करें,मै ये सब बर्दास्त नहीं कर सकता.जिस मंच पर स्त्री की इज्जत न हो,उसका मजाक उड़ाया जाता हो,वहाँ पर मुझे नहीं रहना चाहिए.मंच पर सम्मान और जगह देने के लिए आप लोगों का ह्रदय से धन्यवाद और यदि मैंने कोई गलती की हो और भूल से भी किसी का दिल दुखाया हो तो वो सब लोग मुझे क्षमा करें.सबके लिए सादर प्रेम और अपनी शुभ कामनाओं सहित.

के द्वारा: sadguruji sadguruji

आदरणीय जागरण जंक्शन परिवार,महोदय आप से निवेदन है कि आप के द्वारा "बेस्ट ब्लागर ऑफ़ दी वीक चुने जाने का बाद मेरे नाम से ब्लॉग जारी मेरे ऊपर व्यक्तिगत हमले हो रहे हैं.आप इस ब्लॉग को देखें-"सद्गुरु श्री राजेंद्र ऋषि जी",इस ब्लॉग के अनुसार मै अज्ञानी हूँ और मुझे सम्मानित करने वाले आप लोग अपराधी हैं.कृपया आप लोग स्वयं इस ब्लॉग को पढ़ें.आप से निवेदन है कि बलात्कार पीड़ित लड़कियों और महिलाओं का मजाक उड़ाने वाले इन लेखों को भी आप पढ़ें-"चमेली ने चमन का बलात्कार किया" और "ठीक तो है बलात्कार".इन लेखों में समस्त नारी जाति का अपमान किया गया है.और बलात्कारियों का समर्थन किया गया है.जिस मंच पर स्त्री की इज्जत न हो,उसका मजाक उड़ाया जाता हो,वहाँ पर मुझे नहीं रहना चाहिए.मंच पर सम्मान और जगह देने के लिए आप लोगों का ह्रदय से धन्यवाद और यदि मैंने कोई गलती की हो और किसी का दिल दुखाया हो तो वो सब लोग मुझे क्षमा करें.अपनी शुभ कामनाओं सहित.

के द्वारा: sadguruji sadguruji

आदरणीय सूफी ध्यान मुहम्मद जी,दिन भर की व्यस्तता बाद अब मै खाली हुआ हूँ.मैंने आप का कमेंट पढ़ा है.अब मै गम्भीर हूँ,मेरा जबाब सुनकर बाद में ये मत कहना कि मैंने गहरा मजाक किया था.आप ने मेरी ही नहीं मेरे प्राणप्रिय गुरुओं की भी निंदा की है.ये मै बर्दास्त नहीं कर सकता.आप ने मेरे जबाब का इंतजार भी नहीं किया और मेरे नाम से ब्लॉग पोस्ट कर दिया.क्या है आप के पोस्ट और कमेंट में?केवल किताबी ज्ञान और ज्ञानी ध्यानी होने का झूठा अहंकार,आत्म सम्मोहित होकर बहुत बड़ी ग़लतफ़हमी में जी रहे हैं आप?आप ने अपने आप को सारे संतों से यहाँ तक की आचार्य रजनीश से भी बड़ा मान लिया है.मेरे ब्लॉग "उलटा कुआं गगन में,तिसमें जरै चिराग" की व्याख्या यदि गलत है तो सही व्याख्या करके जबाब देते.ये जबाब देने का सही तरीका था.आप जानते हैं कि ऐसा आप नहीं कर पाएंगे.आप को सम्मान देने का मतलब ये नहीं है कि आप हम सब को अपमानित करें.मैंने आप के लेख "चमेली ने चमन का बलात्कार किया" को पढ़ा,क्या ऐसे लेख लिखना स्वस्थ मानसिकता है?आप बलात्कार पीड़ित औरतों का मजाक उड़ाया है,जिसे मेरी बात पर विश्वास न हो वो ये लेख पढ़ के देखे.इसी लेख के एक कमेंट में आप ने आदरणीय सरिता सिन्हा जी को अपमानित किया है.आप ने पुरुष की तुलना शेर से और औरतों की तुलना गधा से की है.यही आप का ज्ञान और साक्षीभाव है?आप के मुताबिक मंच के सारे ब्लागर मुर्ख हैं और बस आप ही एक ज्ञानी हैं.आप ने जागरण परिवार को अपराधी कहा है,क्योंकि उसने मुझे "बेस्ट ब्लागर ऑफ़ दी वीक" चुना है.ये आप नहीं आप की ईर्ष्या और अहंकार बोल रही है.आप की ग़लतफ़हमी मै दूर कर करना चाहूंगा कि महोदय मै जीवन में इतने सम्मान और पद पा चूका हूँ कि मुझे अब कोई पद या सम्मान नहीं चाहिए.मैंने किसी से ये सम्मान माँगा था?मेरे बहुत से ब्लॉग पब्लिश हुए हैं.आप ने पहले कभी ये मुद्दा क्यों नहीं उठया?इसी समय क्यों ये मुद्दा यथाय है,जब "बेस्ट ब्लागर ऑफ़ दी वीक" चुना गया है?क्योंकि आप को अच्छा नहीं लग रहा है और ईर्ष्या हो रही है.आप ही ये पदवी ले लीजिये,मुझे नहीं चाहिए.अंत में जो सवाल आप ने पूछा है उसका जबाब दे रहा हूँ.“मन का एकाग्र हो जाना ध्यान है और मन का निर्विचार हो जाना समाधी है”आप ने कभी ध्यान समाधी लगाया है.लगाये होते तो ये सवाल खड़ा नहीं करते.गीता का अघ्याय छठा पहले दो तीन बार पढ़ लीजिये,फिर मुझसे इस विषय में बहस कीजियेगा.वैसे आप की जानकारी के लिए बता दूँ कि ध्यान-समाधी कई तरह की है.पता नहीं आप को उसका अनुभव है की नहीं,होता तो ये सवाल खड़ा नहीं करते.रत को सोते समय मन एकाग्र हो ध्यान में बदल जाता है और गहरी निद्रा,जिसमे मन निर्विचार हो जाता है,वो प्राकृतिक समाधी कहलाती है,जो प्राकृतिक रूप से सबको सुलभ है.इसका तो अनुभव आप को हुआ होगा?अंत में मौन होते हुए अपनी शुभकामनाओ सहित.

के द्वारा: sadguruji sadguruji

"उलटा कुआं गगन में,तिसमें जरै चिराग" संत पलटू साहिब का ये भजन है.अपने आध्यात्मिक अनुभव के आधार पर मैंने इस भजन की व्याख्या करने की कोशिश की है.हमारे आश्रम में कई बार संत पलटू साहिब के इस भजन पर ससंग-प्रवचन होचुका है.जागरण जंक्शन परिवार ने "बेस्ट ब्लागर ऑफ़ दी वीक" का जो सम्मान दिया है,वो वस्तुत: संत पलटू साहिब को ही दिया गया सम्मान है.मै तो सिर्फ निमित्त मात्र ही हूँ.मै बड़ी विनम्रता के साथ संत पलटू साहिब की इस वाणी को पढ़ने वाले सभी भाई-बहनो का,इस वाणी पर कमेंट करने वाले सभी ब्लागर मित्रों का और संत पलटू साहिब की इस वाणी को प्रकाशित और सम्मानित करने वाले जागरण जंक्शन परिवार का ह्रदय से आभार व्यक्त करता हूँ.भविष्य में भी ऐसे ही आप सब का सहयोग मिलता रहे,जिससे की और संतो की वाणियों को भी इस मंच पर एक जलते हुए दीपक की भांति प्रकाशित किया जा सके,जिससे ज्ञान की रौशनी दूर दूर तक जाये.आप सबके प्रति हार्दिक प्रेम,हार्दिक शुभकामनाओ और हार्दिक आभार सहित.

के द्वारा: sadguruji sadguruji

के द्वारा: Santlal Karun Santlal Karun

श्रीयुत सम्पादक जी , ‘जागरण जंक्शन’     प्रथम यह कि ‘लेफ्ट साइड बार’ और ‘शीर्ष पट्टी’ में ब्लॉगरों की सूची कभी कई दिनों तक नहीं बदलती और कभी तेज़ी से बदल दी जाती है, आखिर ऐसा क्यों होता है ? द्वीतीय यह कि ‘Jagranjuction.com’ पृष्ठ पर लेफ्ट साइड बार ‘फीचर्ड रीडर ब्लॉग’ में तथा ‘readerblog/’ पृष्ठ पर ‘शीर्ष पट्टी’ में मेरे श्रमपूर्वक लिखे गए दो आलेखों --- पहला, “contest हिन्दी ब्लॉगिंग : नए दौर में सोशल नेट्वर्किंग की आलेखमुखी विधा Posted On: 22 Sep, 2013” और दूसरा “contest हिन्दी ब्लॉगिंग और हिंग्लिश Posted On: 24 Sep, 2013” को चयन से वंचित कर दिया गया, आखिर ऐसा क्यों किया गया ?  कम्प्युटरीकृत अथवा मानवीय दोनों व्यवस्थाओं में उपर्युक्त परिवर्तन-क्रम और चयन-प्रक्रिया की न्याय-संगति का क्या आधार है ? स्पष्टकर अनुगृहीत करें |

के द्वारा: Santlal Karun Santlal Karun

मान्यवर मेरी पोस्ट निराशा ही निराशा प्रधानमंत्री जी पर मेरे पास जी मेल में मेस आया है प्रीती श्रीवास्तव जी और योगी सारस्वत जी की प्रतिक्रिया का और दोनों की प्रतिक्रिया वहाँ से गायब है हमेशा की तरह पठनीय और सराहनीय आलेख ...हार्दिक बधाई! निशा जी , आपने बहुत कुछ कह दिया आदरणीय निशा जी मित्तल ! कितने हैं जो जिन्होंने मनमोहन सिंह का भाषण देखा होगा सुना होगा ? स्पष्ट कहता हूँ वहां जितने थे उसके अलावा बस १-२ हजार ने लेकिन नरेन्द्र मोदी , एक मुख्यमंत्री का भाषण पूरा दीखता है , हर कोई देखता है ! मैं तारीफ नहीं कर रहा हूँ नरेन्द्र मोदी की , करता हूँ लेकिन उचित जगह और उचित मंच पर ! आप मनमोहन सिंह से क्या उम्मीद लगाया बैठे हैं , वो जिनके चरणों की धुल लेकर इस पद पर बैठे हैं उनके गीत गायेंगे वर्ना क्या शास्त्री जी इस लायक नहीं की उनको याद किया जा सके ? क्या ताल जी इस लायक नहीं की उनका नाम लिया जा सके ! मन मोहन ये भूल जाते हैं की वो भारत के प्रधानमंत्री हैं , याद बस एक परिवार रहता है ! हमेशा की तरह सशक्त आलेख दोनों ही कमेन्ट न मेरे डेशबोर्ड पर है न पोस्ट पर इसका क्या कारण हो सकता है ,कृपया बताने का कष्ट करें

के द्वारा: nishamittal nishamittal

मान्यवर महोदय , मैंने 22july को अपनी साईट सम्बन्धी समस्या लिखी थी लेकिन पता नहीं वह कहाँ गयी इसलिए आज पुनः आपको अवगत करा रही हूँ मेरे ब्लॉग का नाम `साहित्य कृति' है जब visit site पर क्लिक करती हूँ तो वह पेज नहीं खुल पा रहा है और दस से पंद्रह मिनट में जब खुलता है तो ऊपर बार पर sahity kriti- part 1 लिख कर आता है वहां प्रारंभ में ही मेरे केवल दस ही पोस्ट दिखाई दे रहीं हैं और शेष न जाने कौन सी व किसी और की पोस्ट हैं और उनमें से किसी भी पोस्ट पर क्लिक करती हूँ तो मेरी बार-बार `तू महान बन..तू महान बन 'एक ही खुलती है जबकि मेरे द्वारा लिखी गयी 74 पोस्ट हैं | मुझे तकनीकी जानकारी नहीं है इसलिए समस्या का सामना करना पड रहा है कृपया समाधान करें | साभार

के द्वारा: alkargupta1 alkargupta1

महोदय आप लोगों की इस पोर्टल का मैं लंबे समय से पाठक हूं.. पर आज पहली बार कमेंट करने का दिल चाहा. आप लोग लाइफस्टाइल और सोशल इश्यो में मसाला कंटेट तो अच्छा डालते हैं लेकिन प्रमोशन सिर्फ लाइफ स्टाइल का करते हैओं.. हाल ही में मैंने एक ऐसा ब्लॉग देखा जो शायद इस मंच का सबसे बढिया और्त शानदार लेख हो सकता था जिसे विशेष रूप से प्रकाशित और प्रायोजित किया जाना चाहिए था नाम है "्ोी्ोदर्द होता है तो दूसरों का दर्द समझते क्यों नहीं, सोशल इश्यू का है लेकिन आप लोगों ने जो पेज पर बैनर चलाएं है वह चालू और मसाला चीजों है ऐसे लड़कियों की सेक्र्ट बातें आदि.. भला समाज का इन बातों से क्या वास्ता लेकिन सोशल इश्यू के इस ब्लॉग से समाज को बदलने मॆं जरूर मदद मिलगी.. मैंने इसे अपने फेसबुक पर भी डाला है.. आप लोग भी चाहे त्रो अपने ब्लोग को होम पेज पर अच्छी तरह दिखा अपनी छवि बदलने की कोशिश कर सकते हैं सीक्रेत बातें और पुरुषों का शोषण जैसे टॉपिक हॉट और मजेदार है लेकिन समाज बदलने जैसी बात इनमॆं एक भी नहीं है.. कृप्या मेरी बाथ पर ध्यान दें ..  "

के द्वारा:

आदरणीय ओम दीक्षित जी, ज्यादा चर्चित, ज्यादा पठित और अधिमूल्यित श्रेणियों में ब्लॉग पोस्ट 10 दिन की अवधि के पश्चात स्वतः परिवर्तित हो जाते हैं. उदाहरण के तौर पर यदि रचना आज प्रकाशित हुई और अगले 3 दिनों में उसको 500 लोगों द्वारा पढ़े जाने के कारण वह सूची में शामिल होने योग्य हो चुकी है तो अंतिम रूप में उस पोस्ट को सूची में अगले 7 दिनों तक ही जगह मिलेगी. किंतु यदि उस अवधि में अन्य रचनाएं उससे ज्यादा पढ़ी गई हैं तो वह स्वतः सूची से बाहर हो जाएगी. इसी प्रकार कमेंट की संख्या के आधार पर ज्यादा चर्चित श्रेणी में और रेटिंग के आधार पर अधिमूल्यित श्रेणी में भी रचनाएं शामिल और बाहर होती हैं. धन्यवाद जागरण जंक्शन परिवार

के द्वारा: Feedback Feedback

मान्यवर महोदय ,एक सुझाव के रूप में मुझको कुछ निवेदन करना है.मुझको जागरण जंक्शन से जुड़े हुए लंबा समय हो चुका है.प्रारम्भ में रचनाएँ दिन में तीन बार फीचर होती थी.एक प्रतीक्षा रहती थी.क्योंकि यहाँ लिखने वालेबहुत ब्लागर लोग मेरे जैसे नौसिखिए भी हैं.निश्चित रूप से इससे पहचान मिली,लिखने की प्रेरणा भी.                                           गत लंबे समय से पोस्ट चेंज होने में बहुत समस्या आ रही है,पहले केवल अवकाश के दिन ऐसा होता था अब तो ये आम है.कल ३ दिन बाद पोस्ट चेंज हुई जिसमें वही समस्या कि कुछ पोस्ट इस श्रेणी में पडी रहती हैं,बाकी १०- १० मिनिट के लिए फीचर हो कर गोल हो जाती हैं आज फिर २४ घंटे बाद भी पोस्ट चेंज न होने के कारण वही स्थिति है.अभी मेरी पोस्ट फीचर होने का सन्देश ४ ४७ पर आपके द्वारा प्रेषित मुझको मिला और ४ ५२ पर देखा था तो मुख पृष्ठ से वो पोस्ट बदल चुकी थी . अतः मेरा तथा अन्य बहुत से जागरण जंक्शन प्रेमी ब्लोगर्स का ये विनम्र सुझाव है कि मंच की उत्कृष्टता बनी रहे ,नव ब्लोगर्स जुड़ें,पुराने लोगों का उत्साह बना रहे ,इस दृष्टि से विचार कर कुछ व्यवस्था निर्माण हो सके तो सबको सुखद लगेगा.

के द्वारा: nishamittal nishamittal

सम्पादक /प्रबंधक ,महोदय ,जागरण जंक्शन. यह देखने में आया है कि....विगत 16 अप्रैल से अब तक आप द्वारा ...फीड-बैक ...पर कोई ध्यान नहीं दिया गया है.18 मार्च के बाद ,अब तक केवल एक बार आप द्वारा लोगों कि प्रतिक्रियाओं पर उत्तर दिया गया है.यदि यह ...शीर्षक उपेक्षित है,तो कृपया इसे हटा दें अथवा कोई अन्य ...पता या मेल दें जिससे अपनी जिज्ञासा अथवा समस्या से आप को अवगत कराया जा सके.मुझे पिछले,27 अप्रैल का कोई उत्तर नहीं मिला.आप से पुनः निवेदन करना है कि ....ज्यादा चर्चित,ज्यादा पठित और अधिमूल्यित ..शीर्षक के अंतर्गत आने वाले ब्लाग ....साप्ताहिक.पाक्षिक ,मासिक या अन्य अवधि में बदले जाते हैं या कोई अन्य तरीका है?क्योंकि कुछ ब्लाग एक सप्ताह में हटा दिए जाते हैं ,कुछ बीस-बीस दिन से ज्यादा अवधि तक बने रहते हैं ,जबकि हटाये गए ब्लाग पर ज्यादा स्टार या ज्यादा कमेंट्स होते हैं?ज्यादा पठित वाले ब्लाग के सामने ...पाठकों की संख्या का भी उल्लेख होना चाहिए ताकि पारदर्शिता बनी रहे.आशा है आप ...फीड-बैक ..शीर्षक पर यदि रोज़ नहीं ,तो साप्ताहिक ध्यान अवश्य देंगे....सादर.

के द्वारा: omdikshit omdikshit

आदरणीय संचालक महोदय इस सम्मानित अनुपम मंच से यमुना का सादर नमस्कार मेरे ब्लॉग संकलन 'आत्माभिव्यक्ति'के ब्लॉग नो.७४ 'वह एक बीज'को टॉप ब्लॉग में स्थान देने के लिए आपका बहुत-बहुत आभार. मुझे अपने ब्लॉगर साथियों से यह विदित हुआ कि ब्लॉग (वह एक बीज)पर प्रतिक्रियाएं सबमिट नहीं हो पा रही हैं.वैसे तो इस पोस्ट को आप के द्वारा recognised और टॉप ब्लॉग के रूप में चयन करने से मुझे सकारात्मक प्रेरणा मिल गई है जो मुझे नित समाज हित में लिखने को प्रेरणा देती रहेगी पर फिर भी अपने ब्लॉगर साथियों की प्रतिक्रिया और मार्गदर्शन की अपेक्षा की भी आशा रखते हुए आपसे निवेदन करती हूँ कि मेरे पोस्ट पर सफलता पूर्वक कमेंट सबमिट ना होने की समस्या का समुचित निदान निकालने की कृपा करें.आपका यह सहयोग मेरे लिए अमूल्य रहेगा. धन्यवाद

के द्वारा: yamunapathak yamunapathak

मान्यवर संपादक महोदय /महोदय रचना की फीचर्ड श्रेणी के विषय मे कुछ मनोगत भाव आपको अवगत कराना चाहती हूँ वैसे तो मेरी सारी रचनाएँ फीचर्ड होती ही हैं लेकिन कई बार देखा है रचना केवल एक दो मिनट के लिए ही इस श्रेणी में आती है इस मंच पर मातृदिवस के लिए `उर की बंजर भूमि पर संस्कृति के अंकुर माँ ' रचना 7 मई को पोस्ट की थी आज दिन तक वह फीचर्ड की श्रेणी में नहीं देख पाई और न हीअधिक पाठक इस रचना से लाभान्वित हो सके | उसके बाद वाली सभी रचनाएँ देख पा रही हूँ जबकि उससे पहले सभी रचनाएँ तीन दिनों तक फीचर्ड की श्रेणी में स्थिर थीं और आज अकस्मात् ही सभी रचनाएँ फीचर कर दी गयी और बहुत ही शीघ्रता से उस श्रेणी में आ जा रही हैं लेकिन अथक परिश्रम से लिखी गयी मेरी रचना नहीं आई |इतनी मेहनत करके लिखी गयी रचना यदि अधिकाँश पाठक नहीं पढ़ पायें तो यहाँ लेखन व्यर्थ ही होगा कृपया अवगत कराएँ क्या आपके मानदंडों पर खरी नहीं उतरी या फिर अन्य कारण था उसके फीचर श्रेणी में दिखाई न देने का | मैं आशा करती हूँ आप मेरे मनोगत भावों का संतोषजनक उत्तर देंगे ..... धन्यवाद

के द्वारा: alkargupta1 alkargupta1

अनिल कुमार ‘अलीन’ के द्वारा January 14, 2013 "आदरणीय संपादक महोदय , अवगत कराना है कि मेरे नाम पर क्लिक करने पर मेरा ब्लाग न खुलकर आपका होम पेज खुलता है जिससे मेरे साथीगण मेरे ब्लाग तक पहुँचने में असमर्थ पते है. इस समस्या से पहिले भी आपको अवगत कराया गया था पर आपकी कृपा दृष्टि न होने के कारण आज भी यह अपने मूल रूप में हैं. अतः श्रीमान जी से निवेदन है कि अपना अति बहुमूल्य समय निकालकर इस समस्या का समाधान करना चाहें……………….. धन्यवाद…………………………….. …………………………….. Feedback के द्वारा January 17, 2013 आदरणीय अनिल कुमार ‘अलीन’ जी, आपकी समस्या जल्द ही दूर कर दी जाएगी. धन्यवाद जागरण जंक्शन परिवार" महोदय आप द्वारा त्वरित करवाई का आश्वासन दिए जाने के उपरान भी मेरी समस्या का समाधान अभी तक नहीं हुआ.कृपया इस समस्या के समाधान के लिए अपना बेशकीमती समय देने का कष्ट करें. धन्यवाद. ..

के द्वारा: अनिल कुमार ‘अलीन’ अनिल कुमार ‘अलीन’

अनिल कुमार ‘अलीन’ के द्वारा January 14, 2013 "आदरणीय संपादक महोदय , अवगत कराना है कि मेरे नाम पर क्लिक करने पर मेरा ब्लाग न खुलकर आपका होम पेज खुलता है जिससे मेरे साथीगण मेरे ब्लाग तक पहुँचने में असमर्थ पते है. इस समस्या से पहिले भी आपको अवगत कराया गया था पर आपकी कृपा दृष्टि न होने के कारण आज भी यह अपने मूल रूप में हैं. अतः श्रीमान जी से निवेदन है कि अपना अति बहुमूल्य समय निकालकर इस समस्या का समाधान करना चाहें……………….. धन्यवाद…………………………….. …………………………….. Feedback के द्वारा January 17, 2013 आदरणीय अनिल कुमार ‘अलीन’ जी, आपकी समस्या जल्द ही दूर कर दी जाएगी. धन्यवाद जागरण जंक्शन परिवार" महोदय आप द्वारा त्वरित करवाई का आश्वासन दिए जाने के उपरान भी मेरी समस्या का समाधान अभी तक नहीं हुआ.कृपया इस समस्या के समाधान के लिए अपना बेशकीमती समय देने का कष्ट करें. धन्यवाद.

के द्वारा: अनिल कुमार ‘अलीन’ अनिल कुमार ‘अलीन’

जे जे संपादक महोदय, मेरा लेख .........क्योंकि रोज़ भूख लगती है.....मेरे द्वारा 16 APRIL को पोस्ट किया गया था,लेकिन यह पोस्ट कहाँ रुक गया था,कुछ समझ में नहीं आया,जब कि स्टेटस.....PUBLISHED दिखा रहा था.यू.एस.आने के पहले जब मैंने साईट खोला तो मेरे ब्लाग में तो पोस्टेड दिखा रहा था,लेकिन रीडर-ब्लाग में 16 से 21 तक कहीं दिखाई नहीं पड़ा.एडिट करने के बाद जब फिर देखा तो ....अभी -अभी में दिखने लगा.लेकिन यह .....16 अप्रैल के पोस्ट में चला गया.संभवतः इसीलिए न तो यह आप की निगाह में आया और न हि किसी पाठक के,क्योंकि यह ....फीचर्ड भी नहीं हुआ और इसका कोई मेल आज-तक नहीं आया .कृपया इसका कारण और निवारण बताएं ताकि भविष्य में यह गलती न हो सके.

के द्वारा: omdikshit omdikshit

एक सम्मानिय और प्रतिष्टित मंच की पहचान. आपका आभार और आपकी चुस्ती, फुर्ती और तेजी को मेरा लाखों सलाम. आपने जिस तेजी से कार्य किया वह कमाल है और वकाई अविश्वसनीय है.. लेख अभी नहीं दिख रहा है पर उम्मीद है जब दिखेगा तो सही होगा.. ऐसी चीजों का भविष्य में ध्यान रखें.. एक और चीज मैं इस मंच को सिर्फ अकेले पढ़ पाती हूं चार लोग बैठे हो तो खोलने की हिम्मत नहीं होती वजह है आपके बोल्ड कंटेंट.. यह अश्लील तो नहीं है लेकिन अश्लीलता की सीमाओं को छुते जरूर है. मसलन लाइफस्टाइल में आज " औरत की बांहों में जाने के लिए तैयार रहते हैं पुरुष" क्या लाइफ स्टाइल में लड़की पटाने के अलावा कैसे रहना चाहिए कैसे कसरत करना चाहिए नही जा सकता.. क्या ऐसा कोई उपाय है जिससे मैं यहा ब्लॉग बना कर अपने परिजनों को प्रफुल्लित और बिना संकोच किए खोल कर दिखाई.. मेरा भी मन हिअ कि मैरा ब्लॉग दैनिक जागरण के अखबार में छपे. और यह अखबार तो मेरे घर भी आता है.. मुझे बहुत अच्छा लगेगा लेकिन जब होम पेज पर ही अंतर्वासना वाली चीजें हो तो बडी बुरी लगतीहैं.. धन्यवाद.. यह सिर्फ सुझाव था मैं तो हमेशा इसकी पाठक रहुंगी और इस तेजी को शायद मरते दम तक ना भूलूं.

के द्वारा:

संपादक महोदय से मेरा एक बडा प्रश्न है: मैं इस मंच को पिछले दो से लगातार पढ रही हूं. महिलाओं के लिए आपका महिला सशक्तिकरण, अनिता जी, निशा मित्तल, जैसी लेखिकाओं का ब्लोग हमेशा पढ़ती हू. जोक्स ,कभी कभी राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर आपकी पकड़ का कोई जवाब नहीं. यह मंच दैनिक जागरण जैसे सम्मानित अखबार का जिसके मेरे दादा-नाना बड़े प्रशंसक थे, का एक भाग है. यूं तो कई बार यहां बासी लेख, चुराए हुए लेखों को भी मैंने जागरण ब्लॉग में देखा लेकिन कभी ही शायद कोई गलत चीज पढी हो जिसपर मुझे गुस्सा आया हो लेकिन आज के आपके लेख को पढ ना जानें क्यूं मैं आवेश में आई.. आपका यह लेख था "बहुत प्यार करता था मैं अपनी बेटी से पर वो……" इस लेख में आज मैंने पाया कि मीडिया जरा सी रीडिंग के लिए कितंना गिर गया है.. हालांकि मैं आप पर ककोई भी आरोप लगाने से पहले यह जानना चाहती हूं कि इस लेख में जो चीजे आपने बोल्ड की हैं वह कहां लिखी गई हैं और इसका प्रुफ क्या है? मैरा इस मंच से मोह ना छुटे इसलिए मैने कई जगह सर्च किया पर नहीं मिला हो सकता है जिस लेखक ने लिखा हो या जिस एडिटर ने एडिट किया हो उसे पता हो सच्चाई का.. लिंक दें ताकि मुझे भी सच्चाई का पता चले.. अन्यथा इस लेख को जल्द से जल्द बदलें

के द्वारा:

मान्यवर महोदय,जागरण जंक्शन एक प्रतिष्ठित साईट है जो ब्लोगर्स को (अनुभवी ,नए) अपने विचार व्यक्त करने का अवसर देती है.,जिससे जुडकर सबको सुखद लगता है. वासुदेव जी के सुझाव के रूप में लिखे इस सन्देश से मेरी भी सहमती है.मान्यवर प्राय पोस्ट जब पब्लिश करते हैं तो कुछ पोस्ट्स किसी दिवस विशेष ,जयंती या अन्य अवसर से सम्बन्धित होती है परन्तु वो अवसर निकल जाने पर जब तक वो फीचर होती है वह अवसर निकल जाता है और उत्साह भी ठंडा पड़ जाता है,यही बात आपके द्वारा पोस्ट का अंश दैनिक जागरण में देने के संबंध में है, आपके विचार से उपयुक्त पोस्ट यदि समय पर फीचर हो जाय या दैनिक जागरण में उसका अंश हो तो उत्साह द्विगुणित हो जायेगा. बहुत सारे ब्लोगर्स का सुझाव है कि कभी तो फीचर्ड पोस्ट २ या ३ दिन भी चेंज नहीं हो पाती और कभी १५ मिनिट में ही फीचर्ड पोस्ट गायब हो जाती है ,कृपया सुझाव पर ध्यान देने का कष्ट करें जिससे अधिकाधिक लोगों का जुड़ाव हो और जुड़े हुए सदस्य और सक्रिय हों धन्यवाद

के द्वारा: nishamittal nishamittal

आदरणीय जागरण जंक्शन टीम, मैं आपके इस प्रतिष्ठित लेखन मंच का एक कनिष्ठ लेखक हूँ किन्तु अपने शब्द लिखने से पहले मैं पूरी स्पष्टता से ज़ोर देकर कहना चाहता हूँ कि ये आग्रह व शिकायत मात्र मेरी शिकायत नहीं बल्कि इस मंच के कई वरिष्ठ लेखकों की समूहिक समस्या है। कुछ ज्येष्ठ लेखकों द्वारा फेसबुक आदि पर मुझसे बार बार चर्चा व मुझे शिकायत दर्ज कराने के निर्देश के बाद मैं स्वयं को शिकायतकर्ता के रूप में यहाँ प्रस्तुत कर रहा हूँ अतः इसे मात्र एक अकेले अदने लेखक की शिकायत न समझा जाए। जिस प्रकार से एक लंबे समय से लेखों को फीचर्ड करने का क्रम अनियमित, अस्त-व्यस्त व अव्यवस्थित है, जिस प्रकार से कुछ फीचर्ड लेख कई दिन तक लटके रहते हैं व नए लेख नेपथ्य में पहुँचते जाते हैं जिनका कि नंबर ही नहीं आता, उससे लेखकों को न सिर्फ असुविधा होती है वरन कई बार लेखों का, जोकि किसी ज्वलंत तात्कालिक विषय पर लिखे गए होते हैं, औचित्य ही समाप्त हो जाता है.!! इस बात पर पुनः बल देना चाहूँगा क्योंकि इससे एक ओर लेखक का प्रयास व समय व्यर्थ हो जाता है, वहीं दूसरी ओर जागरण मंच के पाठकों को भी सामयिक लेख व विचार समय पर नहीं मिल पाते, परिणाम में इससे जो इस मंच को द्विदिशीय छति होती है मुझे नहीं लगता इसके वरिष्ठ संचालक इससे अनभिज्ञ होंगे.!! थोड़ा व्यवसायिक भाषा में, प्रतिस्पर्धा के इस युग में जो दिखता है वो बिकता है, ऐसे में यदि जागरण पर स्तरीय लेख दिखना ही बंद हो जाएंगे तो.... :) फीचर्ड श्रेणी ही जागरण को ब्लॉगस्पॉट अथवा वर्ल्डप्रैस से भिन्न बनाती है व लेखकों को अधिक पाठक उपलब्ध कराने का आश्वासन देती है। अतः गुणवत्तापूर्ण लेखों के साथ न्याय करते हुए इस कमी को सुधारा जाएगा, व इसके लिए उत्तरदाई टीम इसे गंभीरतापूर्वक लेगी, ऐसी मुझे आशा है।

के द्वारा: vasudev tripathi vasudev tripathi

27 फरवरी, 2013 सम्पादकश्री जागरण जंकशन मान्यवर, निवेदन है कि एक बार 12 नवम्बर 2012 को मेरे द्वारा पोस्ट लेख 'माटी का दीया, जीवन-सा जिया' और फिर दूसरी बार अभी पिछले हफ्ते 17 फरवरी 2013 को पोस्ट कविता 'पहचानो मैं कौन हूँ !' को फीचर वर्ग में रखने के उपरान्त भी जागरण जंक्शन के होम पेज पर बाईं तरफ प्रदर्शित 'फ़ीचर्ड रीडर ब्लॉग' वाली कॉलम पट्टी में नहीं दर्शाया गया और साथ ही रीडर ब्लॉग पेज पर शीर्ष-पट्टी से भी वंचित किया गया | आखिर ऐसा क्यों किया गया ? इससे मेरा दोनों लेखन पर्याप्त पाठकों तक न पहुँच सका और उसे अनायास इस सुविधा से वंचित होना पड़ा | क्षमा करें, ऐसा दुबारा जब 13 फरवरी वाली पोस्ट 'पहचानो मैं कौन हूँ !' के साथ भी हुआ, तब लिखने की धृष्टता कर रहा हूँ ! अतएव महोदय, कृपा कर औचित्य बताएँ और यदि मैं किसी भ्रम में हूँ तो भी स्पष्ट कर अनुगृहीत करें| उक्त सम्बन्ध में ई-मेल भी कर चुका हूँ, पर कोई उत्तर न मिला | आप उपर्युक्त दोनों पोस्टों का मूल सन्दर्भ आसानी से पा सकें, इसलिए उनका लिंक भी दे रहा हूँ – (1) माटी का दीया, जीवन-सा जिया http://karunsantlal.jagranjunction.com/2012/11/12/%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%9F%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%A6%E0%A5%80%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%9C%E0%A5%80%E0%A4%B5%E0%A4%A8-%E0%A4%B8%E0%A4%BE-%E0%A4%9C%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE/ (2) पहचानो मैं कौन हूँ! http://karunsantlal.jagranjunction.com/2013/02/17/%E0%A4%AA%E0%A4%B9%E0%A4%9A%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%8B-%E0%A4%AE%E0%A5%88%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%8C%E0%A4%A8-%E0%A4%B9%E0%A5%82%E0%A4%81/ औचित्य की जानकारी के लिए अतिशय आभार मानूँगा |

के द्वारा: Santlal Karun Santlal Karun

आदरणीय तकनिकी टीम, जागरण जंक्शन परिवार ! मेरे ब्लॉग में कमेन्ट का प्रत्युत्तर देने हेतु जो रिप्लाई आप्शन आता है, वह नहीं आ रहा है, जिससे असुविधा का अनुभव हो रहा है ! हो सकता है, मेरी नासमझी से ऐसा हो गया हो ! एक और परेशानी है - मैंने अपने कवि मित्र श्री रामजी पाण्डेय "अकेला" के नाम से एक ब्लॉग अपने ही कम्प्यूटर से उनके लिए बनाया, पर वह मेरे ही ब्लॉग में दिखाता है, उसे कई बार मैंने डिलीट भी किया, पर वह डिलीट नहीं हुआ ! थक हार कर मैंने एक नया ब्लॉग भी बनाया, पर उसमें भी रिप्लाई का आप्शन नहीं आ रहा है ! अगर मेरा पुराना ब्लॉग जो "अग्निपुष्प" के नाम से है, वह दुरुस्त हो जाय तो बहुत अच्छा हो ! मेरे ब्लॉग से श्री रामजी पाण्डेय "अकेला" के नाम से जो ब्लॉग है वह भी हटा दें ! मैं अपना पासवर्ड और यूजर नाम आपको feedback@jagranjunction.कॉम पर भेज रहा हूँ ! उम्मीद है मेरी परेशानी पर आप सभी ध्यान देंगे, और मेरा पुराना ब्लॉग "अग्निपुष्प" ठीक कर देंगे ! मैं केवल इसी ब्लॉग को रखना भी चाहता हूँ ! सधन्यवाद !

के द्वारा: shashibhushan1959 shashibhushan1959

सम्मानित सम्पादकीय मंडल जागरण जंक्शन , अभी मैंने फीडबैक में परम आदरणीय और इस मंच की सर्व सम्मानित सदस्य आदरणीय निशा जी मित्तल का एक सुझाव देखा ! उत्साहित हूँ उनका सुझाव देखकर ! मैं भी कुछ ऐसा सोचता हूँ की आज के समय में जागरण जंक्शन जब इतना बेहतर चल रहा है तब उससे ये उम्मीद और भी बढ़ जाती है की वो देश विदेश में लोगों को हिंदी और उसके लेखन के प्रति ज्यादा जागरूक करे ! ऐसे में ब्लोगर्स का आपस में मेल जोल और परिचय इस बात को और भी महत्व दे पायेगा ! ये सब आप ही कर सकते हैं , हम सिर्फ आपको सुझाव मात्र दे सकते हैं ! एक सुझाव देना चाहूँगा , अगर आपको पसंद आये तो ! आप ब्लोग्गर्स मीट आयोजित करें और उसमें अपनी साईट के कुछ विशिष्ट सदस्यों को सम्मानित करें तो शायद लोगों का रुझान इस ओर , कुछ और भी ज्यादा बढे ! आशा है मेरी और आदरणीय निशा जी मित्तल की बात संपदक मंडल के पास तक अवश्य पहुंचेगी और कुछ न कुछ गौर किया जाएगा ! धन्यवाद

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat

के द्वारा: nishamittal nishamittal

के द्वारा: pawansrivastava pawansrivastava

अति आक्रोश था सुबह, कल भी , परसों भी पिछले १३ दिनों से आक्रोशित ही हूँ .... सहज नहीं हो पा रहा हूँ ... वैसे तो आक्रोश मेरे स्वभाव में है किन्तु विगत १२ माह में जितने मुद्दों पर आवाज उठाते हुए बखेड़े खड़े नहीं किये उनसे अधिक पिछले १२ दिनों में किये! दामिनी की मृत्यु पर.... अंततः जी भरके रो लेने के बाद ... कुछ सहज सा हूँ शायद! किन्तु विगत दो दिनों से पुनर्निवेश में प्रविष्ट समस्या पर कोई सुनवाई नहीं हुई .... इसका दुःख है .... क्योंकि मेरी पोस्ट इस घटना के सन्दर्भ में ही थी .... शायद जब तक कोई 'जाज' प्रतिनिधि पुनर्निवेश पर समस्या को देखेगा वह कालातीत हो चुकी होगी! शायद विगत १ वर्ष में 'जाज' मुझे भूल चुका हो तो याद दिलाना चाहूंगा कि मंच पर इस लेखक द्वारा लिखित ७०-८०% पोस्ट टॉप टेन में रही हैं ! किन्तु मेरी ही अंतर-राष्ट्रीय अवार्ड के लिए नामांकित पोस्ट फीचर तक नहीं हो पाई थी ! तब अन्य लेखकों द्वारा उनके पोस्ट कि वकालत करते देख अनुचित लगता था इसीलिये कई महत्वपूर्ण पोस्ट के अनदेखे रहने पर भी कभी प्रश्न नहीं उठाया .... किन्तु इस बार समस्या अलग है ... पोस्ट फीचर तो हुई ही नहीं ...और लिंक दिख रहा है किन्तु खुल नहीं रहा ! मेरे लेखों में कबीर का सा भाव रहता है कभी एक पक्षीय दृष्टांत रखना मुझसे नहीं हो पाता.... यदि समालोचकों का मंच पर कोई स्थान ना रखना मंच की नीति है तो कोई बात नहीं ... आपको उत्तर देने की भी आवश्यकता नहीं है ...कल रविवार शाम तक हल नहीं निकला तो मैं अपना ब्लॉग पूरी तरह डिलीट कर लूंगा....जिस तरह १९८८ में अनैतिकता के विरुद्ध असहायता प्रदर्शित करने वाले आपके प्रतिद्वंदी समाचार समूह के कारण प्रेस से नाता तोड़ लिया था उसी तरह .... शायद यही हरी इच्छा है ... यही सतगुरु का आदेश ! सतगुरु के संदेशों के प्रसारण का समय दूर है अभी ....

के द्वारा: Charchit Chittransh Charchit Chittransh

आदरणीय संचालक महोदय जी सदर नमस्कार इस अनुपम मंच के माध्यम से मैं प्रतिष्ठित अखबार 'दैनिक जागरण'से सम्बंधित अपनी व्यक्तिगत असुविधा को साझा करना चाहती हूँ.कृपया आप उचित मार्ग निर्देशन करें. पिछले कुछ दिनों से मैं मध्य प्रदेश के कटनी स्थान पर थी.यहाँ मैंने अपने पसंदीदा अखबार 'दैनिक जागरण'का रीवा संस्करण देखा और पढ़ा पर यह पाठकों को आसनसोल या रांची संस्करण के उच्च स्तर की तुलना में संतुष्ट नहीं करता.इसका प्रत्येक पृष्ठ अलग-अलग स्थान की घटनाओं को समेटे था.रीवा संस्करण में ब्लॉग से सम्बंधित कॉलम भी प्रकाशित नहीं था.इसके पृष्ठ संख्या ४ पर 'आइना सरोकारों का'शीर्षक से प्रकाशित विषय सामग्री को पढ़कर अन्य स्थानों से प्रकाशित अखबार (दैनिक जागरण)के मध्य पृष्ठ की कमी बेहद खल गयी. आपसे निवेदन है की इस स्थान और आस-पास के लोगों को रांची ,आसनसोल इत्यादि स्थानों से प्रकाशित जागरण की विषय वस्तु उपलब्ध करा सकें. धन्यवाद.

के द्वारा: yamunapathak yamunapathak

आदरणीय सम्पादक मंडल , महोदय कुछ लोग एक ही दिन में पांच पांच पोस्ट डालते रहते है , अब ऐसे लोग किस स्तर का लेख लिखते है आप लोगो को पता ही होगा , इसलिए मंच पर कुछ ज्यादा ही भीड़ हो जा रही है वो भी घटिया और स्तरहीन लेखो की , जिसके कारण जिन ब्लॉगर मित्रो के लेख अच्छे होते है पर फीचर्ड ब्लॉग में नहीं आते है ,उन पर लोगो की निगाह भी नहीं पहुच पाती कुछ तो ऐसे विचित्र प्राणी है जो लेख के नाम में ही सारा मैटर लिख देते है , अतः उसमे भी शब्द सीमा निर्धारित कर दीजिये , कुछ लोग ऐसे भी है जो बिना कुछ लिखे ही ब्लॉग पोस्ट कर देते है केवल शीर्षक डालकर अतः मंच की सुन्दरता घाट जा रही है और स्तरहीन लेख बढ़ाते जा रहे है . अतः आप सर्वप्रथम इस समस्या पर तो अवश्य ध्यान दे की एक ही व्यक्ति दिन भर में १० पोस्ट न डाल दे. डॉ.भूपेंद्र , लखनऊ ,उत्तर प्रदेश

के द्वारा: drbhupendra drbhupendra

आदरणीय संचालक महोदय सादर नमस्कार आपके द्वारा त्वरित कार्यवाई के लिए अतिशय धन्यवाद.विलम्ब से शुक्रिया अदा करने का मुझे खेद है. इस अनुपम मंच के माध्यम से आपने आम जनता की आवाज़ को न सिर्फ techno -savvy समूह तक बल्कि प्रतिष्ठित समाचार पत्र"दैनिक जागरण'के मध्य पृष्ठ पर स्थान देकर देश-दुनिया तक पहुँचाने की जो खुबसूरत पहल की है,उसके लिए हम सभी ब्लोग्गेर्स आपके अति आभारी हैं. मेरी दिली तम्मन्ना है कि सम्मानीय 'जागरण समूह' प्रत्येक सुबह हम सबकी ज़िंदगी को अपने खुबसूरत logo के सूर्य रश्मियों के चटकीले वर्णों की तरह नयी उमंग,नए उत्साह,नई रोशनी ,नई ऊर्जा और नई उमंग से भरता रहे और हम सभी अपने विचार ,अलफ़ाज़,लब्ज़ और संवेदनाओं में उगते सूर्य सी चमक प्राप्त कर जग को प्रकाशित करने की छोटी सी पहल हमेशा करते रहने की कोशिश करते रहे. पुनः आपका बहुत-बहुत आभार.

के द्वारा: yamunapathak yamunapathak

आदरणीय संपादक महोदय , श्री मान मैंने एक शोधपरक लेख '' आत्मा से देह तक - भारतीय नारी विकासक्रम (भाग-१)'' लिखा , जिसमे मैंने तमाम ऐतिहासिक अध्ययनों को लोगो के सामने रखा , यह लेख महोदय मैंने महीनो मेहनत करके तैयार कर पाया , और जिन भी मित्रो की प्रतिक्रिया आई है सबने इसे अत्यधिक शोध परक लेख माना है , पहले भी आप ने मेरे लेखो को महत्त्व देकर फीचर्ड ब्लॉग में लगाया है , पर इस बार का लेख जो की सबसे ज्यादा शोध परक और जानकारी भरा है उसको आप लोगो ने कोई भी महत्त्व नहीं दिया है, मेरा ऐसा मानना है की संभवतः आप लोगो की निगाह उस लेख पर नहीं पहुची है या फिर पहुची है तो आप लोगो ने उसका गहन अध्ययन नहीं किया है है, महोदय करबद्ध निवेदन है की एक बार उस लेख को अवश्य पढ़े , फिर यदि आपको स्तरीय न लगे तो बेशक आप उसे महत्त्व न दे , पर एक बार उस पर अवश्य निगाह डालिए , यदि मंच की ये निति ही हो की शोध लेखो को कोई विशेष महत्त्व नहीं दिया जायेगा तो कृपया इस बात को भी सूचित कर दे , वरना महीनो के मेहनत के बाद तैयार लेख के बदले मैं कुछ घंटो में तैयार व्यंग विधा ही लिखा करू. क्योकि इतनी मेहनत के बाद यदि अत्यधिक कम पाठक मिले तो निश्चित ही निराशा होती है , आशा है की आप लोग मेरी बातो पर अवश्य ध्यान देंगे, और मेरी समस्या का निराकरण करेंगे... हार्दिक धन्यवाद आपका अपना मित्र - डॉ. भूपेंद्र सिंह (MBBS ) KGMC LKO भारत माता की जय

के द्वारा: drbhupendra drbhupendra

के द्वारा: Malik Parveen Malik Parveen

व्यंग क्यों ? सेक्स पर लिखो न! बड़ी समस्या है , देश के बारे में सोचो तो रोज़ रोज़ हो रहे घपले घोटाले को सुनकर अपना ही खून जलता है, यदि न सोचो तो भारतमाता के साथ गद्दारी हो जाएगी .. इससे अच्छा है की इन घोटालो पर चुटकुला बनाकर दिनभर हंस ही लिया जाय.. मज़बूरी की हंसी … इसमे ”हसी तो फसी” का सिद्धांत काम नहीं करता , यहाँ ”फसी तो हसी” का नया सिद्धांत काम करता है… इसीलिए बुद्धिमान बनकर अपने धैर्य का आत्महत्या करने से अच्छा बकलोल बनकर बकलोली ही कर ली जाय… कभी कभी लोग बीमार होकर पागल नहीं बनते, वे स्थायी पागल न बने इसलिए थोड़े देर के लिए पागल बन जाते है. इसलिए हर पागल को पागल समझना भी कभी कभी पागलपन हो सकता है.. लेकिन हमारा ये महान बुद्धिमान (सभी लोग अपने को बेहद बुद्धिमान ही मानते है चाहे वो इसे व्यक्त करे या न करे ) दिमाग पागल को बुद्धिमान कैसे मान ले , ये भी बड़ी समस्या है ,समस्या की जड़ में अपने आप को बुद्धिमान मानने वाले व्यक्ति की मुर्खता जुडी है . क्योकि स्वयं को बुद्धिमान मानना अहम् को प्रदर्शित करता है. इसलिए सारे स्वयंभू बुद्धिमान जड़ से जड़ ही हैं… तो क्या मैं बकलोली करता हूँ तो मैं वास्तव में बकलोल हूँ?? या फिर खून जलाने से बचना चाह रहा हूँ.? हसते हसते भी अपनी बात पंहुचा सकता हूँ आप लोगो तक और चिल्ला चिल्ला कर , गरिया कर , उत्तेजित होकर भी.. पर मैं अपनी सुविधा देखकर बकलोली कर रहा हूँ.. की मैं वास्तव में बकलोल हूँ.. ये मेरी समझ के बाहर हैं.. पर चिल्लाने के लिए यदि मै तैयार भी हो गया तो क्या आप सुनेंगे ? हसने के लिए गाव में मदारी आता है जोर जोर से डमरू बजाता गाव वाले जुट जाते हैं.. उस हँसी के बदले कोई एक किलो आटा दे जाता है तो कोई एक किलो दाल ,तो कोई बच्चा लेमनचूस खाने वाले पैसे से काटकर ,जीभ पर लात मारकर एक रूपया भी दे देता है ?? शायद व्यंग लिखने वालो को ये एक किलो आटा , दाल और एक रूपया भी नसीब नहीं , क्योकि व्यंग में केवल हसी कहा है जनाब , साथ में गुस्सा भी तो छिपा है … व्यंग लिखने वाला घोषित हो गया बेवकूफ सेक्स पर लिखने वाला हो गया वैज्ञानिक , भले ही चिकित्सा शास्त्र का ज्ञान शून्य हो पर बनेंगे लव गुरु ही.. . सेक्स पर कितना भी गिरकर लिखो सेक्स एजुकेसन कह दिया जाएगा , पर व्यंग लिखने वाले जरा सा भी गिरे तो बेहूदा कह दिए जायेंगे..लोगो को चाहिए चटपटा ,मस्त , बिना गुस्से की लेखनी… इसीलिए जागरणजंक्शन की साईट पर ज्यादा पठित ब्लॉग में निम्न ब्लॉग शामिल है … १- लड़की को पटाने का सुपर हिट तरीका २- सोनू को हुआ टीचर से प्यार ३ – संता की मजेदार शायरी ४ – पप्पू की इंग्लिश ५ – हमबिस्तर होने में जल्दी या देरी ६ – संता का खतरनाक गुस्सा ७ – पत्नी की तीसरी शादी ८ – बरसात में लड़की पटाने के तरीके ९ – पैसे लेकर कराती थी सेक्स – सर्लिन चोपड़ा इन सब लेखो के बीच परम आदरणीय डॉ. सर्वपल्ली राधा कृष्णन का एक लेख पड़ा है , मुझे तो लग रहा है की ये इतने आदरणीय व्यक्ति को गाली देने के ही समान है .. जागरण जंक्शन की साईट खोलते ही निम्न ब्लॉग दिखाई दे रहे है … १ – जिस्मानी रिश्तों के लिए क्या ज्यादा जरूरी – समाज की अनुमति या निजी रजामंदी? २ – Santa Banta Jokes – संता की गूगल डार्लिंग ३ – बच्चे के आगमन से पहले ही विवाह कर लेना चाहिए !! ४ – Sherlyn Chopra: हमाम में तो सब नंगे हैं! ५ – यू आर माई देसी गर्ल.. ६ – Funny Hindi Jokes – ब्यूटी पार्लर की कहानी ७ – 18 Again: कौमार्य महिलाओं का दुश्मन या साथी यदि ऐसे लेख को ही जागरण जंक्सन प्राथमिकता देना चाहता है तो उसे सभी ब्लोगरो को सूचित कर देना चाहिए की भाई सेक्स पर ही लिखो … बिना मतलब के बकलोली की जरुरत नहीं है.. या फिर हम जैसे लोगो पर प्रतिबन्ध लगा दे .. क्योकि देशहित के मुद्दों को उठाकर हम लोग उसके सेक्स सम्बंधित प्रचार प्रसार में दिक्कत कर रहे हैं. सौ की सीधी एक बात मेरा मानना ये है की ज्यादा पठित वाले कालम के चक्कर में कुछ लोग ऐसे लेख लिखते है जो की बिलकुल वाहियात होता है .. अतः इस कालम को बंद कर दिया जाय , नहीं तो सेक्स पर लिखने वालो की ऐसी ही बाढ़ आएगी वही दूसरी तरफ जो लेख जागरण की तरफ से पोस्ट किये जाते है उसमे भी दो तिहाई लेखो में केवल सेक्स होता है ..ये सब बंद किया जाय ,देश में पोर्न साइटों की कोई कमी नहीं है जो आप लोग अपनी भी साईट सेक्स को समर्पित कर रहे है .. आप लोगो की भी हालत नवभारत टाईम्स जैसी हो गयी है जिसमे जानवर के सेक्स पर लिख दिया जाय तो भी छप जाय.. नरेन्द्र मोहन जैसे महान पत्रकारों के खून पसीने से इतना आगे बढ़ा है जागरण ग्रुप कम से कम उनके आदर्शो का तो ख़याल रखा जाय , या फिर जागरण वाले ये कह दे की हम तो उनके मरने का इंतज़ार कर रहे थे.. मित्रो आप लोगो की क्या राय है .. आप लोग भी जरुर बताये … डॉ. भूपेंद्र सिंह

के द्वारा: drbhupendra drbhupendra

आदरणीय अजय सिंह जी, महोदय, यदि आपका पासवर्ड नहीं काम कर रहा है तो आप स्वयं अपना नया पासवर्ड प्राप्त कर सकते हैं। यदि आप का ब्लॉग किसी स्थानीय तकनीकी समस्या की वजह से नहीं खुल पा रहा है तो आप निम्नलिखित तरीके आजमाएं और यदि तब भी समस्या हो तो हमें सूचित करें: 1. कूकीज और रिसेंट हिस्ट्री क्लीयर करें. 2. अपना ब्राउजर अपडेट करें या किसी अन्य ब्राउजर का इस्तेमाल करें. 3. अपनी नेट स्पीड चेक करें. हमारी तरफ से एक सुझाव ये है कि आप अपनी इमेज भी ब्लॉग पर डालें जिससे आपके ब्लॉग की तरफ लोगों का रुझान ज्यादा हो सके। इसके लिए आप लॉग इन करके योर अवतार पर क्लिक करें और निर्देशों का पालन करें। धन्यवाद जागरण जंक्शन परिवार

के द्वारा: Feedback Feedback

आदरणीय संपादक महोदय, महोदय कितनी अजीब बात है कि एक तरफ आप मुझे एक वरिष्ठ और सम्मानित सदस्य कह रहे हैं और दूसरी तरफ आपके ऊपर किये गए व्यंग्य को मेरी भूल बता रहे हैं जो कि दोनों ही बातों में विरोधाभास है. आप मर्यादा और अनुशासन कि बात कर रहे हैं. आप क्या बताना चाहेंगे कि किसी व्यक्ति को बिना दोषी सिद्ध हुए उसे सजा देना कौन सी मर्यादा और अनुशासन? आपको नहीं लगता कि आपकी बातों में या तो बचपना है या फिर व्यवसायीकरण सोच. जब कलम मान-सम्मान और मर्यादा के लिए लिखने लगे तो क्या ऐसे में सच उजागर हो पायेगा, क्या ऐसे में कोई लोकतंत्र के तृतीय स्तम्भ पर कोई विश्वास कर पायेगा. आप भले ही मेरे सवालों का जवाब नहीं देना चाहते हो परन्तु मैं जो सवाल उठाया हूँ उससे आप मुँह नहीं मोड़ सकते और न ही कोई न्याय और सत्य को चाहने वाला व्यक्ति मुझे झूठा साबित कर सकता है. रहा सवाल फीडबैक में आपके नाम से कमेन्ट करने का तो यदि मेरा उद्देश्य अनुशासन तोड़ना होता तो न ही मैं अपना नाम उपयोग किया होता और न ही आपका. फिर आपको लगता है कि मेरे इस व्यव्हार से जागरण जन्शन परिवार को किसी भी प्रकार का ठेस पहुंचा है तो मैं इसके लिए सार्वजनिक रूप से अफ़सोस व्यक्त करता हूँ क्योंकि मैं नहीं चाहता कि मेरे वजह से किसी व्यक्ति अथवा समूह विशेष को किसी भी प्रकार का कष्ट हो परन्तु सच से हम और आप मुँह भी तो नहीं मोड़ सकते..............एक बार फिर अफ़सोस व्यक्त करते हुए आशा करता हूँ कि आप मेरे द्वारा भूतपूर्व में किये गए उद्देश्य को समझते हुए अन्यथा नहीं लेंगे................. धन्यवाद अनिल कुमार 'अलीन'

के द्वारा: अन्जानी- अनिल अन्जानी- अनिल

आदरणीय अनिल कुमार जी, महोदय, आप मंच के एक वरिष्ठ और सम्मानित सदस्य रहे हैं किंतु आपने भूलवश संपादकीय अधिकारों में अनावश्यक हस्तक्षेप किया जिस कारण विवश होकर मंच को आपके ब्लॉग को प्रतिबंधित करने जैसा कठोर कदम उठाना पड़ा। निश्चित रूप से मंच आपकी लेखन प्रतिभा को महत्व देता है और यही कारण है आपके ब्लॉग फीचर और टॉप श्रेणियों में शामिल होते रहे हैं। किंतु आपको यह समझना होगा कि मंच की मर्यादा तभी कायम रखी जा सकती है जबकि "अनुशासन" को सबसे अधिक महत्व दिया जाए। आपको यह बात समझनी चाहिए तदनुरूप अपने व्यवहार को अनुकूल बनाए रखना चाहिए। मंच द्वारा पूर्व में निश्चित किए गए शर्त को पूरा करने के पश्चात आपके ब्लॉग को प्रतिबंध मुक्त कर दिया जाएगा। धन्यवाद जागरण जंक्शन परिवार

के द्वारा: Feedback Feedback

हमारी सदा हमारी सदा, न किसी किसी व्यक्ति विशेष की आवाज है और न ही समूह विशेष की आवाज बल्कि दो ऐसे दिलों की आवाज जो समाज और व्यवस्था के नज़र में सदैव ही दोषी करार दिए गए. हमारी सदा उस सामाजिक, राजनितिक, प्रशासनिक, प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रानिक मीडिया के खिलाफ एक आवाज है जो धर्म, मर्यादा, मान-सम्मान, न्याय-सच इत्यादि का का चोला पहनकर मानवता को तार-तार करती आयी है और आये दिन खुद को सही साबित करने के लिए एक दुसरे पर कीचड़ उछालती आयी है. हरेक व्यक्ति अपने नज़र में सही, हरेक व्यवस्था अपने नज़र में सही तो फिर गलत कौन ?, यह उठक-बैठक क्यों है? सच तो यह है कि "हमारी सदा" हम मानवों की उस मानसिकता के खिलाफ आवाज है जो अपने स्वार्थ और वर्चस्व के लिए जात-धर्म, उंच-नीच, अमीर-गरीब, गोरा-काला, तू-मैं, अपना-पराया, मान-मर्यादा इत्यादि के नाम पर पुरे दुनिया में अशांति, द्वेष, नफ़रत, हिंसा, साम्प्रदायिकता की एक ऐसी आग फैलायी है जिसमे मानवता के साथ-साथ पूरा विश्व तप रहा है. ऐसे में किसी व्यक्ति विशेष, समूह विशेष अथवा व्यवस्था विशेष को समझने की बजाय हमें अपनी मानसिकता को समझना होगा और यह तभी संभव है जब हम दूसरों की बजाय अपने मन की गति को पकड़ पाएंगे. आखिरकर दूसरा भी तो वही चाहता है जो हम चाहते हैं.................................तो फिर.......................................? अभी तक तो आप सभी समझ ही गए होंगे कि आखिर मैं कौन हूँ? जी आपने सही पहचाना .....मैं हूँ अनिल कुमार 'अलीन'....किसी का दोस्त तो किसी का दुश्मन पर हकीकत तो यह है कि न कोई मेरा दोस्त है और न कोई मेरा दुश्मन यह सब आप सबकि मन की उपज है मैं तो वही सामने रखता हूँ जो देखता हूँ. हाँ तो अपने पहले कदम के रूप में, मैं आवाज उठाना चाहता हूँ संपादक महोदय, जागरण जन्शन परिवार पर जिनके ऊपर फीडबैक में मेरी व्यंग्यात्मक टिप्पड़ी के कारण मुझे यहाँ से निष्कासन की सजा सुनाई गयी और वो भी बिना किसी सुनवाई और स्पष्टीकरण के. चलिए मैं मान लेता हूँ कि मैं शत-प्रतिशत दोषी था. परन्तु मुझे अपनी बात रखने के लिए एक मौका तो मिलना चाहिए था. यह कैसी निष्पक्षता और न्याय व्यवस्था है जहाँ बिना कोई स्पष्टीकरण मांगे या फिर बिना कोई गुनाह साबित हुए, सीधे मेल करके सजा सुनाई जाती है कि मेरे गैर-अनुशासनात्मक कृत के लिए मेरे ब्लॉग को बंद किया जाता है और इसे पुनः चालू करने के लिए मुझे सार्वजनिक रूप से अफ़सोस व्यक्त करने के लिए कहाँ जाता है. इससे स्पष्ट होता है कि संपादक महोदय, जागरण जन्शन परिवार या तो गूँगा-बहरा है या फिर कुछ चंद चाटुकारों के अनुसार चलते हैं या फिर हमारी आवाज उनतक पहुँच नहीं पाती और बिच में ही कुछ चमचे अपनी मनमानी कर रहे हैं. ऐसे में संपादक महोदय, जागरण जन्शन परिवार से क्या निष्पक्षता और न्याय व्यवस्था कीउम्मीद की जा सकती है..................? आप सभी का, अन्जानी-अनिल

के द्वारा: अन्जानी- अनिल अन्जानी- अनिल

आदरणीय संपादक मंडल, श्री अनिल कुमार 'अलीन' जो एक प्रतिभावान लेखक हैं उनकी नादानी से भारी गलती हुई है. मुझे ऐसा लगता है उसकी मंशा अन्यथा न रही होगी. आपके द्वारा दिए गए दंड से मेरी असहमति नहीं है पर यदि चेतावनी देकर मौक़ा दिया जाता तो शायद ज्यादा उपयुक्त होता. इंसान तो गलती का पुतला है. गलती किसी से भी हो सकती है. आप बड़े हैं, आपके पास सारे अधिकार हैं. कई लोगों ने आपसे विनम्र अनुरोध करते हुए माफ़ी मांगी है और उन्हें मंच पर अपनी प्रतिभा दिखाए जाने हेतु एक मौक़ा माँगा है. यदि आपके द्वारा लिए गए निर्णय पर पुनर्विचार करने से आपकी गरिमा को ठेस न पहुँचती हो तो कोई मध्य मार्ग निकालते हुए उन्हें एक मौका प्रदान करने की महती कृपा करेंगे. इसी विश्वास के साथ प्रार्थना प्रस्तुत है. मैं भी श्री प्रदीप कुशवाहा जी के विचारों का समर्थन करता हूँ. धन्यवाद.

के द्वारा: jlsingh jlsingh

परम आदरणीय जागरण जंक्शन परिवार , सादर अभिवादन आज मैं आपके समक्ष एक विनती लेकर उतरा हूँ. अस्वस्थता के कारण मंच पर हाजिरी कम रही. श्री अनिल कुमार अलीन जो एक प्रतिभावान लेखक हैं उनकी नादानी से भारी गलती हुई है. मुझे ऐसा लगता है उसकी मंशा अन्यथा न रही होगी. आपके द्वारा दिए गए दंड से मेरी असहमति नहीं है पर यदि चेतावनी देकर मौक़ा दिया जाता तो शायद ज्यादा उपयुक्त होता. इंसान तो गलती का पुतला है. गलती किसी से भी हो सकती है. आप बड़े हैं, आपके पास सारे अधिकार हैं. कई लोगों ने आपसे विनम्र अनुरोध करते हुए माफ़ी मांगी है और उन्हें मंच पर अपनी प्रतिभा दिखाए जाने हेतु एक मौक़ा माँगा है. यदि आपके द्वारा लिए गए निर्णय पर पुनर्विचार करने से आपकी गरिमा को ठेस न पहुँचती हो तो कोई मध्य मार्ग निकालते हुए उन्हें एक मौका प्रदान करने की महती कृपा करेंगे. इसी विश्वास के साथ प्रार्थना प्रस्तुत है. धन्यवाद.

के द्वारा: PRADEEP KUSHWAHA PRADEEP KUSHWAHA

आदरणीय जागरण परिवार आनंद प्रवीन जी की बात से इत्तेफाक रखते हुए में यही कहना चाहूँगा की अनिल कुमार अलीन जी इस मंच की जान हैं उनकी प्रतिक्रियाएँ मनोरंजक तो होती ही थी साथ ही उनमें कुछ यथार्थ होता था में उनका छोटा भाई था और वोह मेरे बड़े भाई इस मंच के जरिये बने थे उनकी प्रतिक्रियाएँ मेरे लेखन को और सार्थक बनाती थी और मुझे अच्छा भी लगता था की मेरे बड़े भाई इस मंच पर प्रतिक्रियाएँ दे रहे हैं और अच्छा भी लगता था अलीन जी मंच के एक परिवार के सदस्य की तरह थे जागरण परिवार से मेरा येही निवेदन है की अनिल जी को अपनी सफाई पेश करने का अवसर दें और ससम्मान उन्हें जागरण मंच पर बुलाएं उनका इस मंच से जाना हम सब रचनाकारों के लिए अपूर्णीय शत्ति है आज वह नहीं हैं तो सुना सुना लगता है जागरण परिवार उन्हें ससम्मान वापस लाये और एक अवसर दे अनिल जी को ससम्मान बुलाने की आशा में आपका सम्मानित सदस्य अजय कुमार पाण्डेय

के द्वारा: ajay kumar pandey ajay kumar pandey

फीडबैक जी नमस्ते महोदय, सविनय निवेदन ये है कि यहाँ ब्लॉगर्स के जो ब्लोग्स प्रकाशित होते हैं उनपर कमेन्ट देने में कभी-कभी बड़ी समस्या हो जाती है.....कभी नेट के कारण तो कभी आपके कोड के कारण | अतः अगर एक "लाइक" बटन भी हर ब्लॉग के साथ हो और साथ ही साथ ये सहूलियत कि ये पता लग सके ली किसने लाइक किया तो समय कि काफी बचत होगी.....और हाँ एक बात और आजकल वाद-विवाद करने वाली "सामाजिक क्रांति" की जनक शक्तियां काफी जागरूक हों गईं है (नीचे देख ही रहे हैं) अतः उनके लिए जैसा कि आदरणीय रक्ताले सर ने कहा की एक अलग कैटेगरी बना दी जाये तो वो उधर जीभर के कच-कच करते रहेंगे और आपके मंच का माहौल भी साफ बना रहेगा....विचार कीजियेगा अच्छा लगे तो ठीक वर्ना जैसी आपकी मर्जी......नमस्कार....

के द्वारा: कुमार गौरव अजीतेन्दु कुमार गौरव अजीतेन्दु

आदरणीय संतोष भाई सादर प्रणाम जैसा कि आपको ज्ञात ही है कि मैंने काफी दिनों से स्वयं को इस मंच की अंदरूनी राजनीति से दूर कर रखा है और शायद मैं आगे भी ऐसा ही करूँ | आता हूँ, लिखता हूँ, और बिना इधर-उधर ताक-झांक किये चला जाता हूँ | अब ये बात और है कि मैंने कभी भी इस मंच पर अतिसक्रिय होकर काम नहीं किया बल्कि सिर्फ उतना ही काम किया जितना जरूरी लगा | लेकिन कुछ लोगों ने जागरण परिवार की अति-सरलता का लाभ उठाकर इसे वैसा नुक्कड़ बना दिया है जहाँ हर कोई अपनी बात/बेढंगी बात को जिद के साथ चिल्ला-चिल्ला के ऐसे कहता है जैसे उसका मनुष्यों से पाला ही पहली बार पड़ा हो | कुछ कुंठित लोग खुद को दार्शनिक समझ बैठे हैं और "समाज" की चिंता करते फिरते हैं जबकि उन्हें अपनी चिंता करनी चाहिए | ऐसे "दार्शनिकों" से मैं कोई मतलब नहीं रखता और न ही कभी रखूँगा | लोगों को भरमाना उनका जन्मसिद्ध अधिकार है | मैं किसी व्यक्ति के विरुद्ध नहीं हूँ बल्कि उस बेमतलब की छूट के खिलाफ हूँ जो जागरण ने अपने ब्लोगर्स को दे रखी है और जिसका अनुचित लाभ लेकर वो किसी की आस्था, विश्वास से खेलने से कभी नहीं चूकते | ऐसे मानसिक बीमारों का इलाज जागरण को करना होगा अन्यथा ये मंच भी लोकतंत्र के अन्य मंचों में बदल जायेगा जहाँ "अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता" के नाम पर विक्षिप्तों को मौका मिल जाता है | जागरण का संपादक मंडल अगर अपनी बेहतरी के लिए कोई कठोर कदम उठाता है तो हमसब को उसका स्वागत करना चाहिए न की विरोध | आशा है आप मुझसे सहमत होंगे | धन्यवाद |

के द्वारा: कुमार गौरव अजीतेन्दु कुमार गौरव अजीतेन्दु

आदरणीय संपादक महोदय, सादर अभिवादन, मान्यवर, निवेदन है कि मैंने आदरणीय राजकमल जी के व्यक्तिगत आलोचना करने वाले आलेखों को पढ़कर, उनके व्यक्तिगत आक्षेप करने वाले विचारों का पूर्व में विरोध किया था। एक आलेख में तो उन्होंने आदरणीय साधना जी पर कुछ अभद्र बातें लिखी थीं। जिसका  लगभग सभी ब्लॉगरों ने विरोध किया था। हाँ एक त्रुटि हो गई कि किसी ने आपसे अपनी आपत्ति दर्ज नहीं कराई। ऐसे कई ब्लॉगर जो उनके विचारों के विपरीत लिखते थे। एक  सुनियोजित षडयंत्र के तहत उन्हें मंच से प्रथक करा दिया। जिसके कारण हमें कई महान विचारकों के विचारों से अनभिज्ञ होना पड़ा। आदरणीय साधना जी के संबंध में अशोभनीय शब्दों का प्रयोग करने वाला आलेख न तो उन्होंने डिलीट ही किया न ही अपने कृत्य की  माफी माँगी। इसके लिये कई ब्लॉगरों ने उनसे निवेदन किया था। उनके लिखने के ढंग से ऐसा प्रतीत होता है कि जैसे जागरण जंक्शन पर उनका प्रभुत्व हो। जैसे दबंग दरोगा राजकमल आदि। किसी ब्लॉगर को इस तरह धमकाना जैसे वह मंच के व्यवस्थापक हों। उनका स्वयं भू गुरू बनना उनके इस षडयंत्र का ही एक हिस्सा है। उन्होंने अब संकल्प किया है कि मुझे मंच से भगा कर रहेगे। इसके लिये उनहोंने साजिश रचना आरंभ कर दी है। वह मुझे अपनी औकात में रहने की हिदायत देते हुये मुझे सनकी  आदि शब्दों से मानसिक रूप से प्रताडित करते हैं। वह अपने दुर्वचनों के प्रहार से मंच से  प्रथक कर देना चाहते हैं। मुझे क्या करना चाहिये, कृपया निर्देशित करें....... मेरा मानना है कि विरोध व्यक्ति का नहीं विचारों का होना चाहिये, जबकि वह सदा से ही व्यक्ति का विरोध करते हैं। खासतौर से उनका जो उन्हें गुरू रूप में स्वीकृति प्रदान नहीं करता। इनके कुत्सित व्यवहार से कई विद्वानों ने मंच को छोड़ दिया है। आदरणीय राजकमल जी ने मेरे संबंध में एक आलेख "यह कैसी आस्तिकता"!!! लिखा है। जिसका उद्देश्य केवल मुझे मानसिक रूप से प्रताड़ित करना है। कृपया आप न्यायोचित कार्यवाही करें। यदि आप अनुमति दें तो उस आलेख के प्रति उत्तर में मैं भी कोई आलेख लिखूँ। व्यक्तिगत आलेखों से भविष्य में मंच का माहौल खराब हो सकता है। और यह मंच भारत का कश्मीर बन जायगा। केवल आदरणीय राजकमल जी की हाँ में हाँ मिलाने वाले ब्लॉगर ही यहाँ बचे रहेंगे। आदरणीय राजकमल जी अपना यह कृ्त्य केवल इसलिये कर रहे हैं, कि मैंने उनके इससे पूर्व दो पोस्टों पर उनके विचारों के विपरीत प्रतिक्रिया दी थी। 1, राजकमल शर्मा काँग्रेसी तथा 2. "अंडर अचीवर" प्रधानमंत्री -अयोग्यता का प्रमाण या गरिमा के साथ खिलवाड़?- राजकमल प्रोडक्शन। प्रति उत्तर की प्रतीक्षा में..... दिनेश आस्तिक

के द्वारा: dineshaastik dineshaastik

के द्वारा: smtpushpapandey smtpushpapandey

आदरणीय जागरण जंक्शन परिवार ,..सादर अभिवादन पिछले कई दिनों से ब्लोगिंग से दूर रहना पड़ा ,..पता चला है की आपने श्री अनिल अलीन जी को प्रतिबंधित कर दिया है ,..उत्साह या अनुत्साह की भावना में उन्होंने जो भी गलती की है उसके लिए निष्कासन की सजा बहुत ज्यादा और अतार्किक है ,..यह मंच निष्पक्ष अभिव्यक्ति का अद्भुत मंच है ,..इसकी गरिमा श्रेष्ठ है ,..हम सब बिना मिले एक परिवार की तरह यहाँ मिलते हैं ,.. आपसे करबद्ध निवेदन है की अनिल अलीन जी का निष्कासन रद्द कर उन्हें सार्थक लेखन के लिए प्रोत्साहित किया जाय ,..उनसे हुई गलती के लिए मैं आपसे क्षमा मांगता हूँ ,..और यह आश्वासन देता हूँ की भविष्य में वो इस तरह के गैरजिम्मेदार कदम नहीं उठाएंगे ,...सादर आभार सहित

के द्वारा:

के द्वारा:

आदरणीय जागरण जंक्शन परिवार .... सादर अभिवादन ! दिव्या बहिन ने इस मंच पर “दंश” नामक शीर्षक के तहत अपनी एक रचना 29 june -2012 को पोस्ट की थी ..... अभी कल के अखबार में ही पढ़ा था की सरकार ने लड़कियों पर तेजाब फेंकने वालों के लिए सजा को बढ़ा कर दस लाख का जुर्माना तथा दस साल की सजा तक कर दिया है .... अक्सर ही हम अखबारों में देखा करते है की समाचारपत्र द्वारा “IMPECT” शीर्षक के तहत अपनी पुराणी खबर और प्रशासन द्वारा उस पर कार्यवाही को बतलाया और दिखलाया जाता है चित्रों के माध्यम से .... आपसे प्रार्थना है की अगर किसी ब्लागर के लेख के बाद सयोंगवश ही अगर कुछ इस तरह से होता है तो उसका उत्साहवर्धन भी आपको करना चाहिए ..... जागरण पर मैं इसके शुरूआती दिनों से हूँ .... इस विषय पर शायद ही कोई दूसरी कविता इस मंच पर पहले इस तरह से लिखी गई होगी ..... आपका इस दिशा में उठाया गया कोई भी कदम इस गरिमामय मंच की गरिमा + स्तर तथा इसकी विश्वसनीयता को आसमान की बुलंदियो तक पहुंचा देगा , जिसकी की हम सभी कामना भी करते है ..... एक सकारात्मक और सार्थक पहल की आशा में अग्रिम आभार सहित

के द्वारा: Rajkamal Sharma Rajkamal Sharma

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat

के द्वारा: मनु (tosi) मनु (tosi)

मान्यवर जे जे परिवार, सादर ! बहुत दिंनों से आपके जंक्शन के पृष्ठों पर एक विज्ञापन प्रदर्शित किया जा रहा है, जिसमें एक गर्भवती महिला का चित्र है ! वह किसी विज्ञापन का हिस्सा है ! ठीक उसके ऊपर पोर्न स्टार का चित्र लगा है ! ऐसे चित्र से अलंकारित पृष्ठों को परिवार में अन्य सदस्यों की मौजूदगी में खोलना बड़ा अजीब सा महसूस होता है ! मुझे लगा की यह कुछ समय बाद स्वतः बदल जाएगा ! पर नहीं ! जब भी कुछ लिखने या पढ़ने के लिए ब्लॉग खोलता हूँ तो वही चित्र सामने आ जाते हैं ! क्या आपलोगों को लगता है की ऐसे चित्रों से या ऐसे विज्ञापनों से जे जे लोकप्रिय होगा ? कम से कम मुझे तो ऐसा नहीं लगता ! समाचार पत्र या पत्रिका में ऐसे विज्ञापन प्रकाशित हों तो कोई बात नहीं, पर इस सम्मानित मंच पर ऐसे चित्रों की क्या उपयोगिता है ? पिछले काफी समय से इन चित्रों की वजह से ही मैं कोई रचना नहीं लिख सका और न प्रकाशित रचनाओं पर कोई कमेन्ट कर सका ! कृपया कर मंच को तो कम से कम इन बातों से बचाएं !

के द्वारा: shashibhushan1959 shashibhushan1959

अजय जी क्या वाकई आप एक लेखक हैं? अगर हां तो शायद आपकी भाषा और हमारी भाषा में ही अंतर है . जिस मंच पर आप लिख रहे हैं उसकी ऐसी कौन सी पोल है जनाब जो आपको पता है जरा हमें भी बताइएं? ऐसा कौन सा राज अजय जी अपने दिल में छुपाए बैठे हैं या बिना वजह यूंही ड्रामेबाजी कर रहे हैं. अखबार में ब्लॉग को छापना का अर्थ है कि उनका लेवल काफी ऊंचा होना चाहिए मैं दैनिक जागरण दिल्ली का अखबार प्रतिदिन पढता हूं और उसके सातवें या आठबें पेज पर शायद जागरण जंक्शन कोना आता है जहां डेली दो ब्लॉग फीचर किए जाते है और दोनों ब्लॉग बहुत ही उच्च कोटि के होते है. और तो और आपके भी तो शायद ब्ळॉग अखबार में गए ही हैं. फिर ऐसी शिकायत... आप मेरे ब्लॉग भी पढॆं : http://jack.jagranjunction.com/

के द्वारा:

आदरणीय जेजे , सादर नमस्कार !!! जेजे एक बात पूछना चाहती हूँ इतनी सारी शिकायतें आप कैसे निपटाते हैं ??? आप तो परेशान हो जाते होंगे !!! इसी परेशानी मे बस आप पूनम 'मनु' को भूल जाते होंगे !!! है न !!!! क्यूंकी जब भी मैं आपसे शिकायत करती हूँ आप सीरियसली नहीं लेते ... अभी 3-4 दिन पहले मेरी कविता "पागल " ज्यादा चर्चित मे शामिल थी शायद बेचारी 1-2 घंटे ... फिर उसके बाद उसका पता नहीं ... बेचारी पागल क्या किसी काम की न थी जो आपकी नज़र उस पर न पड़ी ... कुछ लोगों के लेख तो इस कदर आपको भाते हैं ... चाहे वो कोई भी संदेश न देते हों ...पर ज्यादा चर्चित ,ज्यादा पठित ,अधिक मुल्यित पर कई हफ़्ते 15 दिन तक चिपके रहते हैं क्यूँ ??? आप ये तो कहिएगा मत कि वो लेख ही ऐसे थे ॥ क्यूंकी थोड़ी अक्ल तो हम भी रखते हैं ....बेचारी पागल रचना फीचर्ड भी हुई तो केवल 1-2घंटे के लिए ही ,,इतनी मेहरबानी भी क्यूँ की आपने !!! जरा इस पर गौर कीजिये महोदय !!! और मेरी जिज्ञासा भी शांत कीजिये .... धन्यवाद

के द्वारा: मनु (tosi) मनु (tosi)

आदरणीय जागरण परिवार सादर अभिवादन महोदय, विगत ३ जून, २०१२ को मैंने एक कविता लिखी थी जिसका शीर्षक था "स्वामी रामदेव आप महान हैं"| उस कविता का लिंक मैं नीचे दे रहा हूँ| http://kg70.jagranjunction.com/2012/06/03/%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a5%80-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b5-%e0%a4%86%e0%a4%aa-%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%a8-%e0%a4%b9%e0%a5%88%e0%a4%82/ इस कविता में ऐसी क्या बुराई थी जो इसे फीचर्ड करने के भी लायक नहीं समझा गया? इस कविता में किसी भी व्यक्ति, भाषा, धर्म, लिंग अथवा संप्रदाय पर कोई आपत्तिजनक टिप्पणी नहीं की गई है| ऐसा करना मेरे आदर्शों के खिलाफ है| मैंने इस कविता में स्वामी रामदेव की मुक्तकंठ से प्रशंसा की है क्योंकि मैं उनका प्रशंसक हूँ| स्वामी रामदेव या आचार्य बालकृष्ण कोई असामाजिक तत्व नहीं हैं जिनकी प्रशंसा करना अपराध है और न ही पतंजलि योगपीठ आतंकवादियों का अड्डा है जिसकी जय कहने में कोई आपत्ति की जाये| पूरे भारतवर्ष में मैं स्वामी जी का अकेला प्रशंसक नहीं हूँ| मुझ जैसे करोड़ों हैं| स्वामी जी कालेधन की वापसी को लेकर जो अभियान चला रहे हैं क्या वो गलत है? मैंने भी उसी आन्दोलन का समर्थन मात्र अपनी इस रचना के माध्यम से किया है| लोकतंत्र में सभ्य तरीके से विरोध का अधिकार हर किसी को है| क्या आपकी नजर में ये गलत है? मेरी शंका का समाधान करें| मेरी इस बात को शिकायत न समझते हुए मात्र एक जिज्ञासा समझा जाये ऐसा निवेदन करता हूँ| धन्यवाद|

के द्वारा: कुमार गौरव अजीतेन्दु कुमार गौरव अजीतेन्दु

के द्वारा: Rajkamal Sharma Rajkamal Sharma

महोदय, जैसा की मैंने अपने लेख "अनमोल बनाया जागरण जंक्शन ने" में भी लिखा है की यह मंच नित नए नए प्रयोग करता रहा है और उसके बहुत अच्छे परिणाम भी निकले हैं ! जागरण जंक्शन ने जितने भी पुरस्कार दिए हैं वे विजेताओं के घर पर दिए हैं ! जिस कारण से लेखकों को अपने साथियों से मिलने का, रुबरु होने का मौका नहीं मिला ! मैं जागरण जंक्शन से निवेदन करना चाहता हूँ कि वे एक समारोह दिल्ली में या किसी भी स्थान पर करवाएं जिसमें आज तक के सभी पुरस्कार प्राप्त लेखकों को व अन्य प्रतिष्ठित लेखकों को बुलाएं और सभी का एक दूसरे से परिचय कराये ! इस प्रकार से मिली सराहना से गर्व महसूस होता है और लिखने के लिए नई उर्जा मिलती है और हम और बडे लक्ष्य को हासिल करने का प्रयास करते हैं ! दूसरी बात ! मंच के सभी विजेताओं की सबसे अच्छी रचनाएं, हाल आफ फेम में चयनित रचनाएं तथा अन्य लेखकों की सभी अच्छी रचनाओं को दैनिक जागरण समाचार पत्र के सभी संस्करणों में एक–एक कर लेखक की फोटो व परिचय के साथ प्रकाशित करें जिससे दैनिक जागरण के साढे पांच करोड पाठक पढ सकें और लाभ उठा सकें ! धन्यवाद् राम कृष्ण खुराना

के द्वारा: R K KHURANA R K KHURANA

आदरणीय jj , नमस्कार आज सुबह से आलेख “अन्ध्रेरे के आधार पर विकास करता झारखण्ड ” जिसने आपने featured ” में डाला हुआ है जिसे सुश्री खुसबू जी ने अपने विचार कह के पोस्ट किया हुआ है … वो पूरा का पूरा आलेख टाइप (चोरी ) किया हुआ है प्रथम पैर को छोड़ के … सीर्फ आकड़ा होता तो मैं आपके संज्ञान में नहीं लाती क्योंकि इस तरह के आलेख के लिए आकडे कहीं न कहीं से उठाने होते है . पर चुकी महोदया ने पूरा आलेख ही चोरी का टाइप कर दिया है और संदर्भ भी नहीं दिया है … तो सवाल उठाना स्वाभविक है / आपके जानकारी के लिए बता दू इस आलेख की लेखिका अनुपमा जी है .. जो मर्ज कुछ , दवा कुछ ” के नाम से “तहलका ” के अंक 31may2012 में प्रकाशित है .. चूँकि आप ने सुबह से इसे फीचर किया हुआ है और कल को आप इसे बेस्ट ब्लॉग अफ डी विक भी कर देंगे … तो जानना चाहती हूँ आपकी नजर में ये कहाँ तक उचित है .. क्या जो अपनी स्वरचित और लिखित लेख लिखते हैं क्या उनके साथ नाइंसाफी नहीं होगी .. तो फिर हम भी क्यों मेहनत करे … http://kg16.jagranjunction.com/2012/05/23/%e0%a4%85%e0%a4%82%e0%a4%a7%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%86%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b8-%e0%a4%95%e0%a4%b0

के द्वारा: MAHIMA SHREE MAHIMA SHREE

आदरणीय jj , नमस्कार आज सुबह से आलेख "अन्ध्रेरे के आधार पर विकास करता झारखण्ड " जिसने आपने featured " में डाला हुआ है जिसे सुश्री खुसबू जी ने अपने विचार कह के पोस्ट किया हुआ है ... वो पूरा का पूरा आलेख टाइप किया हुआ है प्रथम पैर को छोड़ के ... सीर्फ आकड़ा होता तो मैं आपके संज्ञान में नहीं लाती क्योंकि इस तरह के आलेख के लिए आकडे कहीं न कहीं से उठाने होते है . पर चुकी महोदय ने पूरा आलेख ही टाइप कर दिया है और संदर्भ भी नहीं दिया है ... टी सवाल उठाना स्वाभविक है / आपके जानकारी के लिए बता दू इस आलेख की लेखिका अनिप्मा जी है .. जो मर्ज कुछ , दवा कुछ " के नाम से 31 may 2012 के अंक में पेज 40-41 प्रकाशित है . चूँकि आप ने सुबह से इसे फीचर किया हुआ है और कल को आप इसे बेस्ट ब्लॉग अफ डी विक भी कर देंगे ... तो जानना चाहती हूँ आपकी नजर में ये कहाँ तक उचित है .. क्या जो अपनी स्वरचित और लिखित लेख लिखते हैं क्या उनके साथ नाइंसाफी नहीं होगी .. तो फिर हम भी क्यों मेहनत करे http://kg16.jagranjunction.com/2012/05/23/%e0%a4%85%e0%a4%82%e0%a4%a7%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%86%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b8-%e0%a4%95%e0%a4%b0/

के द्वारा: MAHIMA SHREE MAHIMA SHREE

माननीय जागरण जंक्सन तकनीकी टीम को सादर नमस्कार मेरा नाम सचिन देव है और जे जे पर मेरा अकाउंट allrounder नाम से है, मैं काफी दिनों से अपनी व्यक्तिगत व्यस्तताओं के कारण जे जे पर लेखन का कार्य नहीं कर पा रहा इसलिए यहाँ की गतिविधियों के बारे मैं जानकारियाँ नहीं है आज मेरे फेसबुक मित्र से पता चला की तकनीकी कारणों से किसी और के पासवर्ड से दूसरे ब्लॉगर्स के अकाउंट खुल रहे हैं मेरे मंच के साथी भदौरिया जी ने नीचे लिखा है की उनके कम्पूटर पर मेरा अकाउंट ओपन था ! मैं काफी दिनों से जे जे पर ब्लौगिंग कर रहा हूँ किन्तु अपने प्रकार की ये अनोखी और खतरनाक समस्या है ! मैंने अभी अपना अकाउंट चेक किया तो सब कुछ सही सलामत पाया, इसके लिए भदौरिया जी का आभार ! आपसे अनुरोध है की इस और त्वरित कदम उठाये जाएँ ताकि भविष्य मैं ऐसी गंभीर समस्या से बचा जा सके ! सध्न्यबाद !

के द्वारा: allrounder allrounder

के द्वारा: ajay kumar pandey ajay kumar pandey

आदरणीय दिनेश जी, मंच ने आपकी शिकायत पर त्वरित संज्ञान लेते हुए कार्यवाही को अंजाम दिया है। जागरण मंच पर इस प्रकार की असंसदीय शब्दावली और दुर्भावना को किसी भी हालत में स्वीकार नहीं किया जा सकता। जागरण जंक्शन सभी ब्लॉगरों तथा टिप्पणीकर्ताओं को ये स्पष्ट दिशानिर्देश जारी करता है कि इस मंच की गरिमा को आंच ना आने दें तथा कभी भी कोई यूजर गलत नीयत से कोई टिप्पणी या ब्लॉग जारी करता है तो इस बाबत मंच पर अपनी शिकायत जरूर दर्ज़ कराएं। मंच ऐसे व्यक्ति को पहले चेतावनी जारी करेगा और इस पर यदि गलत हरकत पर विराम नहीं लगा तो उस व्यक्ति के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्यवाही की जाएगी। मंच द्वारा गलत नीयत से टिप्पणी कर रहे व्यक्ति को भेजी गई चेतावनी नीचे संलग्न है जिसे आप पढ़ सकते हैं। आदरणीय हरिओम जी जागरण जंक्शन ब्लॉग मंच पर आकर अशोभनीय और अमर्यादित टिप्पणियों से आप निरंतर सम्मानित ब्लॉगरों की भावनाओं को आहत कर रहे हैं और यह हरकत किसी भी दृष्टि में सामान्य मानवीय व्यवहार के अनुकूल नहीं है. संपादक मंडल ने आपकी टिप्पणियों को सर्वादित निंदनीय मानकर उन्हें प्रतिबंधित करने की अनुशंसा की है और यदि भविष्य में मंच पर उपस्थित होकर आप ऐसे ही निरर्थक वाद-विवाद व असंसदीय भाषा का प्रयोग करते हैं तो आप पर कानूनी कार्यवाही की जा सकती है. मंच पर आप सिर्फ और सिर्फ स्वस्थ वातावरण को सृजित करने में अपना योगदान दें अन्यथा मंच पर किसी भी दशा में उपस्थित ना हों. धन्यवाद जागरण जंक्शन परिवार

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आदरणीय फीड बैक महोदय नमस्कार आपकी कृपा एवं आशीर्वाद से बहुत ही आश्चर्यजनक स्थिति का सामना करना पड़ रहा है. हो यह रहा है कि अपना अकाउंट लोगिन करता हूँ और खुलता किसी और का. कभी संतोष भाई का तो कभी हरिबोल जी महाराज का. यह क्या हो रहा है या क्यूँ हो रहा है ? क्या आपने एक-दूसरे को लिंक कर दिया है. ऐसा भाई-चारा घातक भी सिद्ध हो सकता है. हो सकता है कोई किसी की पुंगी बजा के चला जाये और असली भाई को पता ही न चले.काम करेगा कोई और, सांसत में पड़ेगा कोई और. यह समस्या सिर्फ मेरे साथ ही नहीं है. अन्य बंधुओं के साथ भी ऐसा ही हो रहा है. कहीं ऐसा तो नहीं सर्वर महोदय का इस भीषण गर्मी और इस मंच के घमासान से, उनके दिमाग का फलूदा बन गया है. या सोफ्टवेयर महोदय अपनी ड्यूटी सही से नहीं बजा रहे हैं. कृपया मार्गदर्शन करें. आपकी अति कृपा होगी. धन्यवाद.....

के द्वारा: ajaydubeydeoria ajaydubeydeoria

श्रीमान संपादक महोदय, किसी भी शख्स के विरुद्ध कोई भी करवाई करने से पहिले सम्बंधित को सूचनार्थ अति आवश्यक होता है और साथ ही उसे अपनी बात रखने का मौका दिया जाना चाहिए. ऐसे ही किसी को दोषी साबित नहीं किया जा सकता. कल चार लोग आकर बोलेंगे की अपनी साईट बंद कर दीजिये तो क्या आप बंद कर देंगे. चलिए मैं कह रहा हूँ कि आपके इस कार्य से न्याय और व्यवस्था अमर्यादित हुई तो आप अपने पोस्ट से श्थिपा दे दीजिये....इस तरह घुर कर देख क्या रहे हैं शिप दीजिये न..........! वैसे मैं तो इस मंच पर अमर हो गया. जब जे जे मंच का इतिहास लिखा जायेगा तो मेरा नाम सुनहले अक्षरों से लिखा जायेगा. आने वाले पाठकगण और ब्लॉगर क्या यद् करेंगे कि उनके मर्यादित और सम्मानित पूर्वजों को एक अकेला अनिल कुमार 'अलीन' हिला कर रख दिया.....हाँ...हाँ...हाँ....मन डोला,.....तन डोला....अब आगे कि पंक्ति याद नहीं पुँराना कलेक्शन खोजिये और आराम से बैठकर सुनिए............!

के द्वारा: अनिल कुमार ‘अलीन’ अनिल कुमार ‘अलीन’

के द्वारा: priyasingh priyasingh

ये भी आप ही का कहना है................ "अस्वीकरण जागरण ब्लॉग पर विभिन्न आलेख, टिप्पणियां , ब्लॉग आदि प्रकाशित किये जाते हैं . इन आलेख, टिप्पणियों , ब्लॉग आदि में सभी व्यक्तिओं को अपने -अपने मत , विचार , भावनाओं को व्यक्त करने की स्वतंत्रता प्रदान की गई है. इसी कारण से जागरण ब्लॉग इन सामग्रियों को उसी रूप में प्रकाशित करता है जिस रूप में वह भेजे गए होते हैं .इनमें व्यक्त विचार लेखकों के स्वयं अपने विचार होते हैं जिनसे जागरण ब्लॉग का सहमत होना जरूरी नहीं है. जागरण ब्लॉग पर, इन सामग्रियों में उपलब्ध किसी आपत्तिजनक , संवेदनशील , हिंसात्मक या आलोचनात्मक मुद्दों , विचारों , भावनाओं की कोई जिम्मेदारी नहीं बनेगी." तो कृपया स्पस्ट करना चाहेंगे कि कब से आप जिम्मेदारी लेने लगे..........................!

के द्वारा: अनिल कुमार ‘अलीन’ अनिल कुमार ‘अलीन’

सभी ब्लॉगरों के लिए सार्वजनिक सूचना गत कुछ समय से मंच पर अनपेक्षित रूप से ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं जिनको जागरण जंक्शन जैसे मर्यादित, गरिमायुक्त तथा मुखर अभिव्यक्ति की आजादी के मानदंडों पर किसी भी दशा में उपयुक्त नहीं ठहराया जा सकता है। साथ ही मंच पर गुटीय प्रतिद्वंदिता व आरोप-प्रत्यारोपण की निरंतर श्रृंखला भी अपनी उच्चतम सीमा का उल्लंघन कर रही है। मंच के प्रतिभावान व गुणवत्ता युक्त रचनाओं का सृजन करने वाले कुछ कृतिकार द्वेष, अहं भाव तथा स्वयं को श्रेष्ठतम सिद्ध करने की कोशिश के तहत अन्यों को नीचा दिखाने की भावना से ग्रस्त नजर आ रहे हैं। ऐसे में मंच की प्रतिष्ठा को अक्षय रखने तथा इसे सार्वजनिक अभिव्यक्ति के योग्य बनाए रखने की बाबत कुछ कठोर निर्णयों की आवश्यकता आन पड़ी है। अत: इस कड़ी में सर्वप्रथम श्री अनिल कुमार ‘अलीन’ की रचना कुत्ता, मैं या तू ? को मंच से निष्कासित किया जाता है साथ ही यह चेतावनी भी दी जाती है कि भविष्य में इस प्रकार की रचनाओं को यहां पर ना प्रकाशित करें अन्यथा उनकी सदस्यता पूर्णतया रद्द कर दी जाएगी। इसके अतिरिक्त इस निर्देश को अन्य रचनाकारों को भी अपने ऊपर लागू समझना चाहिए तथा ये कोशिश करनी चाहिए कि सद्भाव बढ़ाने में संलग्न और बेबाक विचार-विमर्श का यह मंच अपने पूर्व घोषित उद्देश्यों में निरंतर अग्रसर होता रहे। मंच पर उपस्थित इन झंझावातों के बीच आप सभी सम्मानित रचनाकारों के सहयोग के स्वागत सहित आप सभी का हार्दिक आभार धन्यवाद जागरण जंक्शन परिवार

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sinsera के द्वारा May 23, 2012मेरी सदा सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध एक आवाज अनिल कुमार ‘अलीन’ कुत्ता, मैं या तू ?http://merisada.jagranjunction.com/2012/05/20/%E0%A4%95%E0%A5%81%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE-%E0%A4%AE%E0%A5%88%E0%A4%82-%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%A4%E0%A5%82/ sinsera के द्वारा May 22, 2012 48 घंटे से सोच रही हूँ कि इस पोस्ट को कोई “report abuse ” क्यूँ नहीं कर रहा है.? सभी प्रबुद्धजन पढ़ रहे हैं और कमेन्ट भी कर रहे हैं… मुझे कटु व कठोर भाषा कतई पसंद नहीं है लेकिन मजबूरीवश कह रही हूँ कि इस महावाहियत, घटिया, निकृष्ट कोटि के लेख को खुद जे जे ने क्यूँ नहीं हटाया….आश्चर्य है….? समाज की विकृतियों को विकृति के रूप में दिखाया जाये तो पढना बुरा नहीं है, लेकिन 2%मानसिक रोगियों के आधार पर पूरी स्त्री जाति को लेखक महाशय generalize करने की धृष्टता कैसे कर सकते हैं..? यह “x-rated” लेख पूरी स्त्री जाति का अपमान है. मैं लेखक महाशय से इस लेख को तुरंत हटाने की अपील करती हूँ …अन्यथा उनके इस घृणास्पद कृत्य के लिए उनके ऊपर मानहानि का दावा किया जा सकता है…. इस पोस्ट और मेरे कमेन्ट की कॉपी मेरे पास है….कृपया कमेन्ट डिलीट करने का निकृष्ट कृत्य न करें….

के द्वारा:

आपलोग अखाड़ा बनाने से रोकने और सकारात्मक कदम उठाने की बातें कर रहे हैं, तो उसपर कार्रवाई कर दी गई है. जिस महान ब्लॉगर ने उथलपुथल मचाकर सबकी नाक में दम कर रखा है, जिसका सहयोगी नग्न नर्तन कर मंच को रणक्षेत्र बनाता जा रहा है, जिनके उत्कृष्ट कृत्यों से मंच से सज्जन पलायन को विवश हैं, सबके साथ-साथ मंच की गरिमा भी गिरती जा रही है, उस महान लेखक को उसके ताजा ब्लॉग को फीचर श्रेणी में रखते हुए आपको आपका जवाब दे दिया गया है. अब आप समझते रहें की उचित क्या होता है, और अनुचित क्या ! जिन लोगों के पूरे ब्लॉग को अपने स्तर से नष्ट करते हुए सभी सम्मानित ब्लागर्स को सकारात्मक सन्देश दिया जाना चाहिए, उन्हें किस लालच में बढ़ावा दिया जा रहा है, यह अब आप समझ ही जायं तो बेहतर है. अब आगे से महिला पाठकों को आर्गेज्म का चरमसुख प्राप्त करने का गुर सिखाने वाले ब्लॉग ही पुरस्कृत और सम्मानित किये जाएंगे, किसी मुगालते में न रहें. मेरी अपनी एक पहचान है, परन्तु नवरक्ष-संस्कृति के वाहकों का कोपभाजन बनने के भय से अपनी पहचान छुपाते हुए लिखना पड़ रहा है. पंगा लेकर मैं कोई नया विवाद नहीं खडा करना चाहता. हाँ, यदि जागरण छूट दे कि वह बीच में पड़कर निष्पक्षता का ढोंग करते हुए अडंगेबाज़ी नहीं करेगा, तो शर्तिया इलाज की गारंटी दे सकता हूँ. मेरे पास पागल कुत्तों और मनबढों के इलाज के नुस्खे हैं, लेकिन व्यर्थ जाया करना बुद्धिमानी नहीं दिखती.

के द्वारा:

आदरणीय जागरण जंक्शन परिवार ..... सादर अभिवादन ! इया मंच का एक बेहद गरिमामय इतिहास रहा है लेकिन क्या वोह बीते कल की बात ही बन कर रह जायेगी ..... आपने यहाँ पर सभी को समान अवसर प्रदान किये है उनका अनुचित लाभ नहीं उठाया जान चाहिए किसी को भी ..... यहाँ पर अर्नगर्ल भाषा का प्रयोग हो बहुत ही कम नाममात्र रूप में ही देखा है और अगर किसी ने किया भी है तो आपने उसका उचित इलाज भी किया है मित्र आनंद प्रवीण जी के साथ घटित इस घटना की मैं कड़े शब्दों में निन्दा करता हूँ यहाँ पर इस तरह की भाषा का प्र्योफ़ सर्वदा निंदनीय और अक्षम्य अपराध की श्रेणी में माना जाना चाहिए एक दूसरे का सन्मान करते हुए सभी ब्लागर्स को अच्छी शब्दावली का ही प्रयोग करना चाहिए धन्यवाद

के द्वारा:

Pakiya- भाई, अपुन के दिमाग मे एक मस्त आइडिया आ रहेला है….. लखना- तो बक डाल….. Pakiya- भाई अपुन सोचता है……क्यों न आनंद जी को चूड़ी और एक डब्बा लहठी गिफ्ट मार दूँ…… लखना- ऐसा क्यों बकता है बे……पगला गया है क्या तू …… Pakiya- नहीं भाई…अपुन अख्खा है…..अपुन का भेजा एक दम सही जगह पर है……. लखना- तो फिर ये सड़ेला आइडिया क्यों आ रहेला है तेरे भेजे में….. Pakiya- क्योंकि भाई, ये आदमी मेरे को एक दम मौगी के माफिक लगता है…जब देखो शर्म और हया की बातें करता रहता है…… लखना- ही……………ही……………ही……ही………….तू धासूँ है बे……चल कर डाल एक डब्बा लहठी और एक बुर्का गिफ्ट……….. Pakiya- ही….ही….ही…….क्या सही जमेगा चूड़ी और लहठी इन पर………सच्ची…..! मज़ा आ जाएगा…….. लखना- लेकिन …बिल्ली के गले मे घण्टी बांधेगा कौन…I mean…..गिफ्ट ले के जाएगा…..कौन….. Pakiya- भाई आप टेंसन मत लो, मैं इसको ले कर अनिल भाई से बात करता हूँ….शायद वो मान जाएँगे……. आदरणीय जे जे फीडबैक परिवार, नमस्कार यह उक्त बातें मेरे बारे में कहीं गई हैं आप इसका अवलोकन करें की किस प्रकार इसे उचित ठहराया जा सकता है ...........धन्यवाद

के द्वारा: ANAND PRAVIN ANAND PRAVIN

इंडिया मैं पता नहीं कब से चाइना का एलेक्टोरोनिक प्रोदुक्ट्स आ रहा है . लेकिन कभी " भारत सरकार " , राज्य सरकार , प्रदुषण निय्तरण बोर्ड ने ये जानने की कोशिस की .... उसके द्वारा भारत मैं भेजे जा रहे सभी उत्पाद किस स्तर के हैं ... उसने भारत मैं ...घटिया किस्म की प्लास्टिक का इस्तमाल कर रहा है जो की recycle नहीं हो सकती है , वो अपना प्लास्टिक का.. सारा कचरा भारत को दे रहा है कभी भारत सरकार ने ये जानने के कोशिस की है ? या कभी मीडिया नै इसको मुद्दा बनाया... ? china भारत को कचरा बेच कर भरी मात्रा मैं मुनाफा कमा रहा है...उसने एक तरह से भारतीय एल्क्ट्रिक बाजार मैं सिर्फ भारत के रोजगार के चेत्र को बंद कर दिया है .. न तो उसके उत्पाद बढ़िया है न तो उसके उत्पाद के मरमत के जा सकती है .. ऐसे मैं भारत के वजह से उत्पाद खरीद रहा है . एक आम इंसान उसके lottrey जैसे उत्पाद पैर पैसा लगता है .. सिर्फ सस्ता होने के वजह से .. हर दिन उसको घटा झेलना पड़ता है ....भारत की खुद की manufactring करने वाली कंपनी घटा झेल रही हैं ..ऐसे मैं भारत क्यों चाइना बाजार मैं दिलचस्पी दिखा रहा हैं . उसके आखिर क्या मज़बूरी है जो देश को कचरे के डबा बना रहे है ...ओइर इस देह की जनता को इतना नुकसान झेलना पड़ रहा है ..उसके बाद इसे प्लास्टिक के कचरे को मुद्दा बना के करोंडो की यौज्नाये बनाये गी ....आखिर क्यों भारत देश खुदखुशी करने पर लगा है ....ये मेरी विनती है सभी देश वासियों से इसको समझो और अपना देश बचाओ please ...............!

के द्वारा: juliyen juliyen

मान्यवर फीडबैक सदस्य ............बहुत दिन से जागरण ब्लोगर्स के बीच में काफी खींचतान और वैमनस्य का सा माहोल बना हुआ था जिसके लिए लिए कुछ झूठी शिकायते भी की गई .जिसके कारण कुछ लेखको को अनचाहे ही ये मंच छोड़ कर जाना पड़ा ! अगर कोई झूठी शिकायतों पर मंच छोड़ने पर मजबूर हो तो ये शायद मंच के लिए गर्व की बात नहीं होगी ! कृपया श्रीमान राजकमल जी के “मेरे लिए- हम सबके लिए भी हो तेरा इश्क सूफियाना” का अवलोकन करावे ! राजकमल जी यहाँ इस मंच पर वरिष्ठ ब्लोगर है जो कई वर्षो से लिखते आ रहे है इसका ये मतलब नहीं कि वो सर्वेसर्वा हो गये और जागरण टीम का कार्य उनके हाथ में आ गया !मेरे लिए भी वो आदरणीय रहे है किन्तु अपने किसी ब्लॉग में किसी महिला ब्लोगर पर व्यक्तिगत टिप्पणी करना बहुत अशोभनीय प्रतीत हो रहा है ! ये पहले भी लिखते रहे है पर किसी ने आक्षेप नहीं उठाया ,पर आपसे निवेदन है कि श्री राजकमल जी की पोस्ट डिलीट की जाये और उन्हें चेतावनी दी जाये कि भविष्य में वो किसी भी व्यक्तिगत आक्षेप शुदा ब्लॉग यहाँ पोस्ट न करे !क्यूंकि कोई भी पोस्ट प्रकाशित होने में आप जागरण सदस्यों की सहमती जरुरी है ! ये एक महिला विशेष की नहीं सभी महिला ब्लोगर्स का अपमान है ,अत: आपसे निवेदन है कि उक्त पोस्ट को डिलीट करने का सौहार्द करावे जिससे उस महिला ब्लोगर का और अपमान न हो ...........आभार सहित

के द्वारा: D33P D33P

आदरणीया परवीन जी, मेरी माँ…. प्यारी माँ नाम का आलेख फीचर्ड की लिस्ट में शामिल किया था किंतु शायद किसी तकनीकी खराबी की वजह से सूचना आप तक देर से पहुंची जिससे आप उसे मुख्य पृष्ठ पर नहीं देख सकीं। पापा मैं रोज रोज नहीं मर सकता नामक ब्लॉग आज ही फीचर्ड की सूची में सम्मिलित हुआ है जिसे आप हमारे मुख्य पृष्ठ पर प्राप्त कर सकती हैं।  जागरण जंक्शन मंच ने आपकी रचनाओं को उत्कृष्ट श्रेणी में रखा है एवं आपकी कई रचनाएं दैनिक जागरण में भी प्रकाशित की जाती रही हैं। इससे आपको और सभी पाठकों को आश्वस्त होना चाहिए कि मंच किसी के साथ भेदभाव नहीं करता और रचना की उत्कृष्टता उसे सम्मान का हकदार बनाती ही है। साथ ही मंच आपको ये स्पष्ट कर देना चाहता है कि कुछ दिनों पूर्व हुई घटना आईडी हैक से संबंधित नहीं थी बल्कि किसी अन्य मेल आई डी द्वारा मंच की सम्मानित ब्लॉगर निशा मित्तल के नाम से कमेंट करने की थी जिस पर त्वरित चेतावनी भी जारी की गई। मंच तकनीकी रूप से अत्याधिक दुरुस्त है इसलिए यहां पर किसी की आई डी हैक नहीं की जा सकती है। आप निश्चिंत होकर ब्लॉगिंग करें। धन्यवाद जागरण जंक्शन परिवार

के द्वारा: Feedback Feedback

के द्वारा: कुमार गौरव अजीतेन्दु कुमार गौरव अजीतेन्दु

आदरणीय jj , मैं पहली बार कोई फ़रियाद रख रही हूँ ! मुझे न तो विवादों में घिरना अच्छा लगता है न ही विवाद खड़ा करना ! मेरा article मेरी माँ.... प्यारी माँ... , मुझे मेल द्वारा सूचना मिली की आपकी पोस्ट फीचर हो गयी है लेकिन जब मैंने ओपन किया तो कही मुझे फीचर हुयी नहीं दिखाई दी ! क्या कहेंगे आप इसके बारे में ??? दूसरा मेरा article " पापा मैं रोज रोज नहीं मर सकता " मैंने इतनी मेहनत से लिखा लेकिन अब तक फीचर नहीं हुआ क्या कमी है उसमे बताने का कष्ट करे ... मैं चाहती हूँ की मेरी ये समस्या पहली और आखिरी रहे ... धन्यवाद.... ( एक और बात कहनी है अभी पिछले दिनों काफी हंगामा हुआ मंच पर ... किसी की भी id हैक करके कोई भी कमेन्ट कर देता है इसका जवाबदेही कौन होगा ? id वाला या फिर आप लोग .... privacy कहाँ रही फिर जब कोई हमारा अकाउंट ही खोल सकता है तो ??) आशा है आप लोग उचित निर्णय लेंगे ..

के द्वारा: mparveen mparveen

आदरणीय जेजे , सादर अभिवादन आप शायद ठीक कह रहे हैं ,हो सकता है हमारे लेख व रचनाएँ आपके संपादकीय पृष्ट के अनुरूप नहीं हों ,,, लेकिन मैं ये भी कहूँगी की चाहे आज से आप मेरी कोई रचना फीचर्ड करें या न करें कोई डर नहीं मैं सोचती थी कि यहाँ पर पक्षपात नहीं होता ...पर होता है ये मंच भी इस दुनियादारी जैसी चीज से ग्रसित है ,,, मैं तथा मेरे जानकार आपके संमपादकीय ब्लॉग को पढ़ते हैं उनमे कई बहुत उच्च कोटी के होते है इसमें कोई शक नहीं पर कई बिलकुल भी इस लायक नहीं होते ...मैं सोचती हूँ कि आपसे न लड़ूँ पर क्यूँ न लड़ूँ बताइये आप ... मेरे गुरु जिनके ब्लॉग और लेख अक्सर अखबारों मे छपते हैं ... तो उन्हे बड़ा दुख होता है ,कि मनु इस ब्लॉग से तो तुम्हारा ब्लॉग कहीं बेहतर था .... मैंने सोचा सर्वप्रथम रोज़ अखबार का वही पृष्ट लपकने के लिए जो मुझे परिवार मे जद्दोजहद करनी पड़ती है , फिर निराशा हाथ आने से तो अच्छा है कम-स कम आप से लड़ लूँ ताकि मेरे मन को चैन आ सके .... आप ही बताइये क्या मुझे यहाँ से जाना होगा ???????? कृपया जवाब जरूर दीजिये ...धन्यवाद कई बार हक लड़ कर लेना पड़ता है .... शुभ रात्री

के द्वारा: मनु (tosi) मनु (tosi)

आदरणीय गौरव जी एवं आदरणीया मनु जी, आप दोनों रचनाकारों के ब्लॉग सामान्य रूप से फीचर्ड की श्रेणी में आते रहे हैं किंतु उन्हें दैनिक जागरण में स्थान नहीं दिया जा सका क्योंकि वे रचनाएं हमारे संपादकीय पृष्ठ के मानकों के अनुरूप नहीं थीं। किंतु इसका ये कतई अर्थ नहीं कि आपकी रचनाएं अच्छी नहीं थीं या उनमें कोई दोष था और ना ही कमेंट की संख्या से इसका कोई संबंध है। बल्कि आपको हमारे संपादकीय पृष्ठ के अनुरूप रचना करनी होगी जिन्हें अवश्य प्रकाशित किया जाएगा। बहुत शीघ्र एक सामान्य दिशा निर्देश जारी किया जाएगा ताकि आप सहित अन्य रचनाकारों के विभिन्न संशयों का निवारण हो सके। धन्यवाद जागरण जंक्शन परिवार

के द्वारा: Feedback Feedback

आदरणीय ओम दीक्षित जी, आपकी रचनाओं की गुणवत्ता निःसंदेश उच्चकोटि की हैं और इसी कारण इन रचनाओं को फीचर्ड किया गया साथ ही उन्हें टॉप 5 व टॉप 2 में भी स्थान मिला। किंतु दैनिक जागरण के संपादकीय पृष्ठ पर छपने के लिए उस पृष्ठ के अपने मानक हैं और हम वही ब्लॉग वहां प्रकाशित करते हैं जो उस पृष्ठ के मानकों पर आधारित होते हैं। इसलिए आप निश्चिंत होकर ब्लॉगिंग करें। चूंकि ये समस्या कई रचनाकारों को हो रही है इसलिए हम एक सामान्य दिशा-निर्देश प्रकाशित करेंगे ताकि सभी को फीचर्ड, टॉप ब्लॉग, टॉप 5 ब्लॉग, हाल ऑफ फेम ब्लॉग व दैनिक जागरण में प्रकाशन के कारणों की सूचना मिल सके। धन्यवाद जागरण जंक्शन परिवार

के द्वारा: Feedback Feedback

आदरणीया निशा मित्तल जी, आप मंच की सर्वाधिक प्रतिष्ठित रचनाकारों में हैं ये मंच पर आने वाले हर किसी सदस्य को पता है। आपकी भाषा शैली व मंच की मर्यादा के प्रति निष्ठा में किसी को कोई संदेह नहीं होना चाहिए। यकीनन मंच पर आपके नाम से टिप्पणी रखने की किसी ने शरारत की है और ये टिप्पणी nisha@hotmail.com नामक मेल आई डी से जारी की गई है। महोदया, जागरण जंक्शन मंच एक सार्वजनिक मंच है किंतु इसका ये अर्थ नहीं लगाया जाना चाहिए कि यहां हर गलत हरकत बर्दाश्त कर लिया जाएगा। आपके नाम से की गई ये हरकत पूरी तरह गलत है और हम इसकी निंदा करते हैं साथ ही शरारती तत्वों को कड़ी चेतावनी जारी करते हैं कि यदि मंच पर ऐसी हरकत जारी रहती है तो ऐसे शख्स के विरुद्ध कानूनी कार्यवाही की जा सकती है। आप से अनुरोध है कि आप निश्चित होकर मंच पर अपने विचार व्यक्त करें और अराजक तत्वों की उपेक्षा करें। धन्यवाद जागरण जंक्शन परिवार

के द्वारा: Feedback Feedback

मान्यवर महोदय ,जागरण जंक्शन पर राज कमल जी के ब्लॉग दरोगा राजकमल शर्मा पर एक प्रतिक्रिया मेरे नाम से है" एक बात और कान में कहना चाहूंगी, लाइए अपना कान ज़रा इधर. दीवारों के भी कान होते हैं, और नहीं चाहूंगी कि आपके बनते बाजार पर मेरे कारण कोई असर पड़े. आप जिसे चाहे पकड़कर बंद कीजिए, मुझे कोई एतराज नहीं है. लेकिन अगर आपने मेरे वोटरों अर्थात मेरे ब्लॉग पर प्रतिक्रया रूपी वोट देने वालों को आँख उठाकर भी देखा, तो मैं भी आपकी पोलपट्टी खोल दूंगी, कहे देती हूँ. बता दूंगी कि थानेदारी की ट्रेनिंग से पहले आप मेरे सामने कान पकड़कर ऊठक-बैठक लगाया करते थे. सारे जानवर समझ जाएंगे कि आप रंगे सियार हैं." न तो ये मेरी भाषा है आप मेरे पूरे कमेंट्स में ऐसी भाषा कभी नहीं पायेंगें ये तो षड्यंत्र है इमेज बिगड़ने का कृपया उपाय बताएं

के द्वारा: nishamittal nishamittal

आदरणीय जागरण जंक्शन ! सादर नमस्कार ! महोदय मैं ये जानना चाहती हूँ की मेरी एक भी रचना या लेख दैनिक जागरण अखबार के ब्लॉग नामक कॉलम मे क्यूँ नहीं छप पाता है । क्या कोई मेरी प्रोफ़ाइल सेटिंग मे कमी है या कोई और बात है । कम से कम 20 लेख व कविता मेरी जेजे में पोस्ट हो चुकी हैं ,,, क्या आपकी नज़र मे एक भी इस लायक नहीं थी की वो अखबार मे जगह पा सकती ॥ सर सभी ब्लॉगर अच्छे हैं ।तो सभी आपको प्यारे होंगे । पर किसी किसी के साथ ये सौतेला व्यवहार क्यूँ ???? मुझे बताइये किस मापदंड पर रखते हैं आप लेख या रचनाएँ ... मैं उसी प्रकार की लिखूँगी ... हर कोई इंसान आगे बढ़ना चाहता है , जब हमे आपने ये मंच दिया है तो आगे बढ्ने के रास्ते भी दीजिये .... धन्यवाद पर आप मेरी समस्या का समाधान जरूर कीजिये मैं आपकी आभारी रहूँगी ....

के द्वारा: मनु (tosi) मनु (tosi)

प्रबंधक (फीडबैक ) ,महोदय. दिनांक १९-३-२०१२ .....प्यार होता है क्या .....हम नहीं जानते दिनांक २७-३-२०१२ ...शायद वह ..शबनम ही थी और दिनांक २२-४-२०१२ ....डाक्टरों ..की...रंगदारी..... मेरे उक्त तीनो ही ब्लाग टॉप-ब्लाग्स टॉप-५ और टॉप- टू में , आप द्वारा ही दिखाए गए थे,लेकिन इन्हें ..छापा नहीं गया,कृपया ..इनकी कमियों से मुझे ..अवगत कराये .यदि ये छपने योग्य नहीं थे,तो इन्हें ..टॉप-२ में ,लिया ही क्यों गया?......डाक्टरों से रंगदारी ...तो आप ने ..इ-मेल से भी सूचित किया है कि इसे ...टॉप-५ में भी ....सबसे ऊपर रखा गया है. तो किस कारण से उसे आज तक नहीं छापा गया.कृपया......छपने के लिए आवश्यक बिंदु को उजागर करें, ताकि....ब्लागरों को पारदर्शिता का एहसास हो. मेरे.....महिलाओं ने बाज़ी मारी....ब्लाग के सुझाओं पर भी ध्यान दे.

के द्वारा: omdikshit omdikshit

आदरणीय महोदय / महोदया ..... सादर अभिवादन ! आपके सहयोगात्मक रवैये का मैं कायल हो गया हूँ .... आपने मेरी आँखे खोल दी है अब मैं कापी पेस्ट करके कमेन्ट करने की बजाय उसको सीधा ब्लॉग पर ही लिख कर पोस्ट करता हूँ ..... इसके बावजूद भी भविष्य में भी यदि फिर से इस प्रकार की समस्या उत्पन्न हुई तो दुबारा से आपके दरबार में हाजिर हूँगा ..... लेकिन मैं अपने मन की एक जरूर आपसे सांझा करना चाहूँगा की *मैंने पिछले अढ़ाई साल के दौरान किसी भी ब्लागर को फीडबैक पर अपनी समस्या रखने में किसी प्रकार की परेशानी से दो चार होते नहीं देखा है ..... इसलिए आप हरेक ब्लागर के ब्लॉग की सेटिंग फीडबैक की ही तरह से अगर कर दे तो ज्यादातर साथीयों की समस्या का जड़ से समूल नाश हो जाएगा ..... *इससे हमे अपना लिखा हुआ कमेन्ट, कोड वगैरह की गलती की वजह से पोस्ट ना हो पाने पर खो जाने पर दुबारा नहीं लिखना पड़ेगा ...... *आनलाइन हम तेजी से नहीं लिख सकते इसलिए अपनी बात को संक्षेप में रखते है इसी कारण से ही पूरी तरह से अपने विचार एक दूसरे से सांझा नहीं कर सकते है ..... जागरण जंक्शन की दिन दोगुणी और रात चोगुणी तरक्की की कामना के साथ हार्दिक आभार सहित ( आपसे एक और विनती है की अगर भूलवश मेरी आई डी में एक से ज्याद ब्लॉग खुले हुए है तो फालतू ब्लॉग को किरपा करके डिलीट कर दे , या फिर उनको डिलीट करने का तरीका बतला दीजियेगा ) पुनः हार्दिक आभार

के द्वारा: Rajkamal Sharma Rajkamal Sharma

आदरणीय आशु जी, महोदय, जागरण जंक्शन मंच पर बेस्ट ब्लॉगर का चयन एक विशेष प्रक्रिया के द्वारा होता है जिसके अंतर्गत ब्लॉग पोस्ट की विषय वस्तु, समाज व राजनीति को प्रभावित करने की क्षमता, प्रस्तुतिकरण, गांभीर्य और यदि व्यंग्य या काव्य विधा की रचना हो तो उसमें संतुलन व शाब्दिक व्यंजना व शैली काफी महत्वपूर्ण होती हैं। ये ध्यान रहे कि बेस्ट ब्लॉग का "प्राप्त कमेंट की संख्या व उसे कितने पाठकों ने पढ़ा" से कोई संबंध नहीं होता बल्कि केवल ब्लॉग पोस्ट की गुणवत्ता देखी जाती है। यही कारण है कि कई ऐसी रचनाओं को बेस्ट ब्लॉग का खिताब मिलता रहा है जिनकी पाठक व कमेंट संख्या बेहद कम रही है। अंतिम रूप से जागरण जंक्शन संपादक मंडल बेस्ट ब्लॉग के रचनाकार को बेस्ट ब्लॉगर घोषित करता है। फीडबैक में अपनी समस्या रखने के लिए आपका आभार धन्यवाद जागरण जंक्शन परिवार

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आदरणीय जागरण परिवार सप्रेम नमस्कार महोदय, यहाँ प्रकाशित लेखों को उनकी गुणवत्ता के आधार पर निष्पक्षता के साथ कई श्रेणियों में जैसे फीचर्ड ब्लॉग, टॉप ब्लॉग, बेस्ट ब्लॉगर ऑफ़ द वीक, टॉप फाइव ब्लॉगर ऑफ़ द वीक में प्रकाशित किया जाता है और मानकों पर खरा उतरने के बाद दैनिक जागरण अख़बार में भी प्रकाशित भी किया जाता है. ये बहुत अच्छी बात है और इससे सुधि लेखकों को प्रोत्साहन मिलता है. लेकिन मान्यवर ऐसा होता है की कभी-कभी एक ही ब्लॉग दो-तीन जगहों के लिए चयनित हो जाता है और किसी अन्य उत्कृष्ट रचना को कहीं स्थान नहीं मिलता. अतः मेरे विचार से हर लेख को उसकी उत्कृष्टता के आधार पर किसी एक ही श्रेणी के लिए चयनित किया जाना चाहिए. इससे और ज्यादा लोगों को इस मंच पर सम्मानित किया जा सकेगा और विवेकीजनों को और बेहतर करने के अवसर/प्रोत्साहन प्राप्त होंगे. ये सिर्फ मेरा एक परामर्श है और इसे किसी तरह की शिकायत न समझा जाये.

के द्वारा: कुमार गौरव कुमार गौरव

आदरणीय भारत कुमार जी, महोदय, जागरण जंक्शन मंच पर धार्मिक विद्वेष को जन्म देने वाले या व्यक्तिपरक अशोभनीय वक्तव्य का प्रकाशन प्रतिबंधित है. इस मंच का उपयोग सार्थक संवाद को बढ़ावा देने के लिए होना चाहिए ना कि किसी व्यक्तिगत लाभ की भावना से. मंच किसी भी प्रकार की ऐसी असंसदीय आलोचना का विरोध करता है जिससे लोगों की धार्मिक, जातिगत, सामुदायिक या स्वयं की मर्यादा पर आंच आती हो. आपके ब्लॉग में ऐसी ही कमियां परिलक्षित होने के कारण उसका अस्थायी तौर पर सार्वजनिक प्रकाशन रोक दिया गया है. यदि आप इन कमियों को दूर करने का आश्वासन देते हैं तो आपका ब्लॉग प्रतिबंध मुक्त कर दिया जाएगा. धन्यवाद जागरण जंक्शन परिवार

के द्वारा: Feedback Feedback

महोदय , में चाहता हूँ की आप featured Reader blog के coloumn को लम्बा कर दे , क्यूंकि उस पंक्ति में निचे जगह होने से और भी गुंजाइश है ,featured Reader ब्लॉग की संख्या बढ़ाये , और इक सुझाव बेस्ट ब्लॉगर ऑफ़ वीक reader द्वारा चुना हुआ भी हो .अर्थात इक आप संपादको द्वारा और इक reader द्वारा , क्यूंकि कई बेहतरीन आलेख आप की नजरो में नहीं आ पाते, और समाचार पत्र में जागरण junction ke sath Reader Blog likha , jisse नव लेखको को इस मंच का बोध हो सके , और इक रोष मूलत: इस मंच पर कविओं को आप जाने क्यूँ तवज्जो नहीं देते , ना ही वो सम्मान , जबकि कवी घंटो परिश्रम कर के गढ़ता है कविता और ब्लॉग के MAIN PAGE पर रचनाकारों की सूचि नाम की HEADING हो जिस पर CLICK करने पर इक पेज रचनाकारों के नाम की सूची का खुले , और वर्तमान समय में कुल रचनाकारों की संख्या इत्यादि और सबसे सुन्दर सुझाव देने वाले बन्धु को सम्मानित कर आप इस पल को और यादगार बना सकते है आपके ज्ञानबोध से कभी हमारी रचनाओ का आकलन और टिप्पणी कीजिये , मै इस बात के लिए अति उत्साहित हूँ की आप जैसे गुणीजन को क्या इस रचनाओ की भीड़ मे मेरी रचना इक अंश भर भी छु पाती है की नहीं , मै केवल आपके विवेचना भर का इच्छुक हूँ इस उपेक्षा से मुझे अपराधबोध की अनुभूति है की मंच पर मे इतने समय से हूँ और मेरे शब्दों मे वो पुकार नहीं जो आपको यंहा तक खिंच लाये , क्रप्या मीठी कटु कैसे भी विचार या सुझाव हो अवगत कराये इक विशेष बात इस मंच पर मुझे अपने मन के बात कह लेने देने के लिए मै जीवन भर आपका क्रत्धन रहूँगा

के द्वारा: चन्दन राय चन्दन राय

आदरणीय अजय जी, जागरण जंक्शन सभी पाठकों के लिए एक समान नीति संचालित करता है और इसमें किसी भेदभाव या वरीयता की कोई जगह नहीं है। जब भी आपकी रचना का स्तर ऊंचा होगा उसे फीचर्ड भी किया जाएगा और उसे अखबार में भी प्रकाशित किया जाएगा। किंतु ध्यान दें कि अखबार में प्रकाशन के लिए कुछ और भी शर्तें महत्वपूर्ण हैं मसलन - रचना तभी प्रकाशित होगी जबकि वह दैनिक जागरण के संपादकीय पृष्ठ के अनुकूल हो या उसमें समसामयिकता के साथ राजनीतिक व सामाजिक संदेश देने की क्षमता हो या यदि वह काव्य है तो उसमें सारगर्भिता व व्यंजनिकता का पुट मौजूद हो... आदि। मंच पर अपनी उपस्थिति बनाए रखें और लेखन में उत्कृष्टता की कोशिश जारी रखें। धन्यवाद जागरण जंक्शन परिवार

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आदरणीय जागरण जंक्शन परिवार सप्रेम नमस्कार अभिव्यक्तियों को व्यक्त करने का एक प्रतिष्ठित मंच उपलब्ध कराने के लिए आपका धन्यवाद. जागरण जंक्शन एक गरिमामय मंच है. अतः यहाँ पर शिष्टता का स्थान सर्वोपरि होना चाहिए. हाल के कुछ दिनों में ऐसे कुछ लेख यहाँ प्रकाशित हुए हैं जिनमें धार्मिक गुरुजनों पर और लोगों की आस्थाओं पर बेहद अशिष्ट, अमर्यादित और असंसदीय भाषा का प्रयोग करते हुए अभद्र टिप्पणियां की गई हैं. कुछ अपरिपक्व लोग मंच की प्रतिष्ठा का ख्याल न करके अपनी भावनाओं को अशोभनीय ढंग से प्रस्तुत कर रहे हैं. किसी व्यक्ति विशेष का नाम लेना नहीं चाहूँगा, वो आपलोगों के विवेक पर छोड़ता हूँ. जिस तरह 'आज़ादी' का अर्थ सड़क पर 'पेशाब' करना नहीं है उसी तरह 'अभिव्यक्ति की आज़ादी' का अर्थ किसी की 'आस्था को ठेस' पहुँचाना नहीं होना चाहिए. ये सभ्य लोगों का मंच है, यहाँ स्वस्थ परिचर्चा होनी चाहिए, असभ्यता का वातावरण नहीं बनना चाहिए. आशा है मंच मेरे अनुरोध पर विचार करेगा. धन्यवाद.

के द्वारा: Kumar Gaurav Kumar Gaurav

महोदय, मैं मधु सक्सेना झाँसी ( उत्तर प्रदेश ) में रहती हूँ..अपनी वयोवृद्ध माँ के साथ, दिनांक २६ मार्च को दोपहर में , मैं किसी काम से हॉस्पिटल गई थी , मेरे जाते ही मेरे पड़ोस में रहने वाले हिमांशु --जिसकी उम्र सिर्फ १५ साल है, अपनी माँ के साथ मेरे घर में घुस आये और आते ही मेरी माँ जो कि ८३ साल की है , उनपर कातिलाना हमला करके उनके दोनों हाथो व् गले की नसें काट दी ... माँ के बेहोश होते ही इन दोनों ने मेरी माँ के बदन के जेवर के साथ साथ अलमारी में रखे करीब ५० हज़ार रूपए भी निकाल लिए, जब मैं वापस आई तो माँ को मरणासन्न हालत में देख कर घबरा गई. बहुत खून बह चूका था....लेकिन माँ की साँसें चल रही थीं. मैंने तुरंत उन्हें मेडिकल पहुचाया ..रस्ते में होश आने पर उन्होंने इन दोनों माँ बेटे का नाम बताया. आज मेरी माँ जिंदगी और मौत के बीच लटकी हुई है. मैंने माँ के बताये अनुसार एफ. आई. आर. भी करवाई है. उस लड़के को भी पोलिसे ने गिरफ्तार कर लिया है...लेकिन माँ और बाप को पुलिस ने नहीं पकड़ा, साथ ही इस प्राणघातक हमले के बावजूद सिर्फ लूट की धाराओं में मुकदमा लिखा है. जिससे साफ़ ज़ाहिर होता है की पुलिस ने खा पी कर मामला रफा दफा कर दिया है. आप स्वयं सोचिये की एक १५ साक के नाबालिक लड़के को क़ानून कितनी सजा देगा, जबकि असली अपराधी उसके माँ बाप खुली हवा में सांस ले रहे हैं ? मेरी माँ की हालत दिन ब दिन गिरती चली जा रही है...और मुझे नहीं लगता की वो जिंदा रह पाएंगी. माँ के बाद अकेली मैं , समाज में रहने वाले ऐसे जानवरों से किस तरह खुद को बचा पाउंगी ? ये मुझे मार कर ...फिर बच जायेंगे . क्यूंकि कानून बिकाऊ है...जिस तरह अभी बचे हुए है. आपसे मेरी हाथ जोड़ कर विनती है की ...आप अपनी मिडिया की ताकत से इन नर पिशाचों को उनकी असली जगह पहुंचाइए..ताकि समाज में मेरे जैसी असहाय नारी भी चैन से जिंदगी जी सके. मुझे पूरी उम्मीद है की आप और आपकी टीम मेरी मदद जरूर करेगी. धन्यवाद. निवेदिका मधु सक्सेना . झाँसी उ.प्र . 9450081710.

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आदरणीय श्री फीडबैक जी , मैं अपने ब्लॉग जब फेसबुक या अन्य जगह पर शेयर करता हूँ तो उन्हें कोई अपने नाम से कर देता है ! अभी तक दो मामले इस तरह के आये हैं ! मेरी एक पोस्ट " जिंदगी .....एक पहेली " को किसी सीमा शर्मा ने फेसबुक पर अपने नाम से कर दिया और मेरी एक और पोस्ट " दफ्तर के मच्छर " को किसी धर्मेन्द्र हर्ष ( बीकानेर ) ने ब्लॉग स्पोट पर अपने नाम से प्रकाशित कर दिया ! हालाँकि मेरे शुभचिंतकों ने इसके विषय में मुझे तुरंत सूचना दी जिसकी वजह से मैंने उन्हें संपर्क करने के बाद उनके पेज से पोस्ट हटाने के लिए कह दिया है ! और वो ऐसा ही करेंगे ! मैं आपसे पूछना चाहता हूँ की अगर भविष्य में ऐसा कुछ होता है तो क्या मैं आपके माध्यम से ऐसे लोगों को copyright कानून का उल्लंघन करने पर कानूनी नोटिस भेज सकता हूँ ? मैं बिलकुल नहीं चाहता की कोई मेरी कविताओं और अन्य रचनाओं को अपना नाम दे ! सलाह दें ! बहुत बहुत धन्यवाद ! आपके उत्तर का इंतज़ार रहेगा !

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat